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पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश सिंह को पांच साल की कैद, बहू और पत्नी को भी हुई सजा

फर्जी वसीयत कर स्‍वतंत्रता सेनानी की जमीन कब्‍जाने का मामला

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लखनऊ

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Hariom Dwivedi

Mar 03, 2020

Ex UP Minister Prem Prakash

पूर्व मंत्री पर आरोप था कि उन्होंने फर्जी वसीयत के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामअवध सिंह की जमीन अपने नाम कर ली है

देवरिया. फर्जी वसीयत के मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व सहकारिता मंत्री प्रेम प्रकाश सिंह को रुद्रपुर सिविल जज सीनियर डिवीजन ने पांच वर्ष की सजा सुनाई है। पूर्व मंत्री के अलावा उनकी बहू निधि, पत्नी मंजूलता, पूर्व शासकीय अधिवक्ता स्वतंत्र बहादुर सिंह, पत्नी गीता सिंह व उनकी बहू को भी सजा सुनाई गई। इन सभी को अंतरिम जमानत मिल जाएगी, लेकिन पूर्व मंत्री को जेल भेजा जाएगा। पूर्व मंत्री पर आरोप था कि उन्होंने फर्जी वसीयत के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामअवध सिंह की जमीन अपने नाम कर ली है। प्रेम प्रकाश मूलरूप से यूपी के देवरिया जिले के पैना गांव के रहने वाले हैं।

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पूनापार,आजमगढ़ के मूल निवासी रामअवध सिंह आजाद हिंद फौज के सिपाही रहे। बाद में वह पुलिस में भर्ती हुए, जहां से वह डिप्टी एसपी के पद से रिटायर हुए थे। स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को देखते हुए तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें कृषि कार्य के लिए मौजूदा ऊधमसिंह नगर जिले के रुद्रपुर के बागवाला गांव में 32 एकड़ जमीन आवंटित की थी। 10 जून 1999 को रामअवध की मृत्यु हो गई, जिसके बाद जमीन उनकी इकलौती पुत्री प्रभावती देवी के नाम दर्ज हो गई। शादी के बाद वह आजमगढ़ की तहसील बूढ़नपुर क्षेत्र के सिंघोड़ा गांव में रहने लगीं। इस बीच पूर्व मंत्री ने फर्जी वसीयत तैयार कराकर जमीन अपने नाम करा ली।

प्रभावती देवी ने पुलिस में इसकी शिकायत करते हुए तीन मई 2014 को प्रेम प्रकाश के साथ ही वसीयत के गवाह ग्राम तिलियापुर, सितारगंज निवासी नवनाथ तिवारी और प्रेमनारायण को नामजद करते हुए केस दर्ज कराया। सभी के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471, 506, 504 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच में पूर्व मंत्री की पत्नी सितारगंज की तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख मंजूलता सिंह, पुत्र शिव वर्धन, बहू निधि सिंह, एसबी सिंह, उनकी पत्नी गीता सिंह और बहू शिखा सिंह के नाम भी सामने आए। जून 2018 में पुलिस की चार्जशीट में प्रेम प्रकाश सिंह को धारा 420, 467, 468, 471, 504, 506 व 342 आईपीसी, गवाह नवनाथ तिवारी व प्रेमनारायण को धारा 420, 467, 468, 471 व 120 बी का आरोपित पाया गया। निधि सिंह, शिव वर्धन सिंह, मंजू लता सिंह, शिखा सिंह एवं गीता सिंह को धारा 420, 468 व 120 बी व एसबी सिंह को 120 बी का आरोपित माना गया। मंगलवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन छवि बंसल ने आरोपितों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।