9 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

Munawwar Rana: शायर मुनव्वर राणा की तबीयत बिगड़ी, वेंटिलेटर पर किए गए शिफ्ट, अगले 72 घंटे बेहद महत्वपूर्ण

Munawwar Rana: मशहूर शायर मुनव्वर राणा की तबीयत खराब हो गई है। उन्हें लखनऊ के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल वेंटिलेटर पर रखा गया है। डॉक्टरों ने अगले 72 घंटे उनके स्वास्थ्य के लिए बेहद अहम बताए हैं।

less than 1 minute read
Google source verification

लखनऊ

image

Priyanka Dagar

May 25, 2023

hospital.jpg

शायर मुनव्वर राणा लखनऊ के अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती

Munawwar Rana: मशहूर शायर मुनव्वर राणा की तबीयत बिगड़ गई है। इसके चलते उन्हें लखनऊ के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मुनव्वर राणा को अपोलो अस्पताल के आईसीयू वार्ड में वेंटिलेटर पर रखा गया है। उनकी बेटी सुमैया राणा ने देर रात साढ़े तीन बजे वीडियो जारी करते हुए इसकी जानकारी दी है।

अगले 72 घंटे बेहद अहम
राणा की बेटी और सपा नेता सुमैया राणा ने बताया कि उनके पिता की तबीयत पिछले दो-तीन दिनों से खराब चल रही थी। डायलिसिस के दौरान उनके पेट में दर्द था , जिसके चलते डॉक्टर ने उन्हें एडमिट कर लिया। सीटी स्कैन में आया कि उनके गॉल ब्लैडर में कुछ दिक्कत है , जिसके चलते उसकी सर्जरी की गई।

मिली जानकारी के मुताबिक, तबीयत में सुधार नहीं हुआ तो अब डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर पर रख दिया है। हालांकि डॉक्टर उनके स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखे हुए हैं और इन्फेक्शन को कम कम करने की कोशिश की जा रही है। डाक्टरों ने राणा के लिए अगले 72 घंटे काफी क्रिटिकल बताए हैं।

काफी समय से चल रहे हैं बीमार
पिछले साल भी उनकी तबीयत बिगड़ गई थी जिसके बाद उन्हें लखनऊ के एसजीपीजीआई (SGPGI) में एडमिट कराया गया था। राणा किडनी की परेशानी की वजह से डायलिसिस पर चल रहे हैं।

कौन हैं राणा
मुनव्वर राणा प्रसिद्ध शायर और कवि हैं, उर्दू के अलावा हिंदी और अवधी भाषाओं में लिखते हैं। मुनव्वर ने कई अलग शैलियों में अपनी गजलें प्रकाशित की हैं। उनको उर्दू साहित्य के लिए 2014 का साहित्य अकादमी पुरस्कार (Sahitya Akademi Award) और 2012 में शहीद शोध संस्थान द्वारा माटी रतन सम्मान से सम्मानित किया गया था। उन्होंने लगभग एक साल बाद अकादमी पुरस्कार लौटा दिया था। साथ ही बढ़ती असहिष्णुता के कारण कभी भी सरकारी पुरस्कार स्वीकार नहीं करने की कसम खाई थी।