समाजिक कार्यकर्त्ता रिधि गौर ने बताया कि मुगलों ने जब इस मंदिर पर धावा बोला था तो यहां के पंडितों ने यहां स्थापित मूर्ति को बचाने के लिए उसे एक कुएं में फेंक दिया था, जिसकी वजह से हमारी धरोहर तो बच गई, लेकिन देवी कि मूर्ति की जगह लक्ष्मी -विष्णु कि विग्रह मूर्ति की स्थापना कि गई। आज जिस मूर्ति को हम माता काली की मूर्ति समझ के पूजा करते हैं वो लक्ष्मी -विष्णु हैं।