प्रदेश
के कांग्रेस मुख्यालय के मालिकाना हक को लेकर स्थिति अभी भी साफ नहीं
है। व्यापारी मनीष अग्रवाल द्वारा मुख्यालय पर अपना मालिकाना हक के दावे के
विरोध
में कांग्रेस इतने दिन बीतने के बाद भी अपना कोई भी साक्ष्य पेश नहीं कर
पाई है। वहीं विभागीय प्रमाण जुटा रहे नगर निगम के हाथ भी अब तक कुछ ख़ास
नहीं लगा है।
मामले के संज्ञान में आने के बाद नगर निगम ने रिकॉर्ड
रूम में पड़ी अपनी पुरानी फाइलों को तलाशना शुरू किया था। इसके लिए सोमवार
का वक़्त तय किया गया। समय पूरा होने पर भी नगर निगम इन फाइलों को ट्रेस
नहीं कर पाया है। मामले की जांच कर रहे कर अधीक्षक नरेंद्र देव ने बताया कि
फाइल रिकॉर्ड से डाक विभाग भेज दी गयी है। लेकिन डाक विभाग के कर्मचारी
चले गए थे। इसलिए अब ये फाइल कल ही मिल पाएगी। फाइल मिलने के बाद ही कोई
निर्णय लिया जा सकेगा। अगर रिकॉर्ड के दस्तावेज मनीष अग्रवाल के दस्तावेज
से मेल खाते हैं तो फिर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को नोटिस भेज दस्तावेज
उपलब्ध करने की बात कही जाएगी।
नगर निगम को इन फाइल में ये तलाशना है कि आखिर 1986 में आखिर नगर निगम के दस्तावेज़ों में अचानक रामस्वरूम अग्रवाल और पद्मावती अग्रवाल के साथ मोहसिना किदवई का नाम कैसे जुड़ गया। किस आदेश या किसके आवेदन के बाद ये प्रक्रिया की गयी।