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बिना लाइसेंस के चल रही दुकान, फूड विभाग की कार्यवाही नाकाम

शहर में बिना लाइसेंस की कई दुकानें अभी भी चल रही हैं। जिन पर नकेल कसने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधी प्रशासन विभाग द्वारा की जाने वाली कार्यवाहियां नाकाम साबित हो रही है

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Prashant Mishra

Apr 26, 2016

raj shekhar

raj shekhar

लखनऊ. शहर में बिना लाइसेंस की कई दुकानें अभी भी चल रही हैं। जिन पर नकेल कसने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधी प्रशासन विभाग द्वारा की जाने वाली कार्यवाहियां नाकाम साबित हो रही है। गौरतलब है कि, फरवरी माह में जिलाधिकारी राजशेखर के निर्देशों पर फूड विभाग ने अभियान चलाकर दुकान मालिकों को लाइसेंस बनवाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया था। यही नहीं अवैध तरीके से चलने वाले दुकान मालिकों पर कार्यवाही करते हुए चालान भी काटे थे।

लेकिन विभाग द्वारा की गयी इन कार्यवाहियों का दुकानदारों पर कोई असर नहीं है। विभाग को ठेंगा दिखाते हुए वे धड़ल्ले से बिना लाइसेंस के दुकान मालिक अपनी दुकानें चला रहे हैं। चारबाग से लेकर पुराने लखनऊ, आलमबाग, चौक समेत कई इलाकों में धड़ल्ले से बिना लाइसेंस के दुकानें चल रही है। वहीं विभाग सिर्फ कार्यवाही करने व जांच अभियान चलाने की बात कहकर खामोश बैठी हुई है।

बिना लाइसेंस के दुकाने चलाने को मजबूर व्यापारी

खाद्य एवं औषधी प्रशासन विभाग द्वारा फरवरी एवं मार्च माह में 86 दुकानदारों को लाईसेंस जारी किये गये हैं। जबकि, दुकान खोलने के लिए विभाग में आने वाले आवेदनों की संख्या रोजाना 5 से 10 है। देखा जाये तो आवेदन मिलने की अपेक्षा लाइसेंस देने को लेकर विभागीय अधिकारियों की सक्रियता न के बराबर है। यदि रोजाना लाइसेंस आवेदन की संख्या 5 से 10 है तो एक महीने में तकरीबन 150 से 300 आवेन विभाग के पास आ रहे हैं। वजह जो भी हो, यदि विभागीय अधिकारी लाइसेंस देने को लेकर गंभीरता से काम करें तो जारी होने वाले लाइसेंस का प्रतिशत 50 से कम नहीं रहता। जिस कारण अपनी रोजी रोटी के चक्कर में बिना लाइसेंस के ही दुकानों को चलाना पड़ रहा है।

ये है प्रक्रिया

दुकान खोलने के लिए 2 माह के अंदर आनलाइन आवेदन के बाद ही कोई भी व्यक्ति अपना कारोबार कर सकता है। यदि किसी कारण से लाईसेंस नहीं जारी होता है तो भी वह अपना कारोबार शुरू कर सकता है। लेकिन उसके बावजूद भी दुकान चलाने के लिए लाईसेंस लेना अनिवार्य है। आवेदन करने के दौरान जिस स्थान पर व्यक्ति दुकान खोलना चाहता है उस स्थान की डिल, आईडी प्रूफ, निर्धारित फीस ट्रेजरी चालान पर जमा कराया जाता है।

यदि सालाना टर्न ओवर 12 लाख रुपये से दुकानदार का कम है तो 100 रुपये चालान यदि अधिक है तो 2 हजार रुपये चालान जमा करने होते हैं। आवेदन विभाग को प्राप्त होने के बाद विभाग के अधिकारी डीओ द्वारा चेक किया जाता है। फिर आवेदन को एफबीओ फूड बिजनेस आपरेटर के पास भेज दिया जाता है। जहां पूरी डाक्यूमेंट्स का वैरीफिकेशन व स्थलीय निरीक्षण करने के बाद लाइसेंस जारी किये जाते हैं।

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