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राम मंदिर पर फैसला देने वाले जज को बनाया राज्यपाल, विपक्ष ने उठाए सवाल, कौन हैं अब्दुल नजीर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नए राज्यपालों की तैनाती की है। इसमें सबसे ज्यादा चर्चा में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एस. अब्दुल नजीर हैं। विपक्ष इसे न्यायिक प्रणाली के लिए खतरनाक बता रहा है।

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लखनऊ

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Vishnu Bajpai

Feb 13, 2023

Former SC Judge Abdul Nazeer Who Gave Decisions Like Ayodhya Ram Mandir And Demonetisation

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज अब्दुल नज़ीर बने आंध्र प्रदेश के नए राज्यपाल

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एस. अब्दुल नजीर को राज्यपाल बनाने पर विवाद बढ़ रहा है। कांग्रेस व अन्य राजनीतिक दलों ने इसे न्याय प्रणाली के लिए खतरनाक बताया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने कहा “शीर्ष अदालत के पूर्व जजों को सरकारी पोस्ट देना 'दुर्भाग्यपूर्ण' है. इससे लोगों का यकीन जुडिशियरी पर कम होता चला जाता है।” कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने पूर्व कानून और वित्त मंत्री अरुण जेटली के एक बयान का हवाला दिया। इसमें जेटली ने 2013 में कहा था “सेवानिवृत्ति से पहले के निर्णय सेवानिवृत्ति के बाद की नौकरियों और न्यायपालिका के लिए इसके खतरे से प्रभावित होते हैं”

यह न्यायपालिका के खिल खतरा
सिंघवी ने कहा, "हम भी इसी भावना को साझा करते हैं. यह न्यायपालिका के लिए खतरा है।" उन्होंने कहा, "यह किसी व्यक्ति विशेष के बारे में नहीं है, क्योंकि मैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानता हूं। लेकिन सिद्धांत रूप में हम सेवानिवृत्ति के बाद न्यायाधीशों की नियुक्ति के खिलाफ हैं।"

कौन हैं पूर्व जस्टिस एस अब्दुल नजीर
जस्टिस एस. अब्दुल नजीर पिछले महीने चार जनवरी को सुप्रीम कोर्ट जज के पद से रिटायर हुए हैं। जस्टिस नजीर अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर फैसला देने वाली बेंच के सदस्य रहे हैं। इस बेंच की अगुवाई पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने की थी। उन्हें सरकार की ओर पूर्व में राज्यसभा भेजा जा चुका है। अब रिटायर होने के बाद जस्टिस एस. अब्दुल नजीर को आंध्र प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ से ताल्लुक रखते हैं जस्टिस नजीर
जस्टिस नजीर का जन्म का जन्म 5 जनवरी 1958 को कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के बेलुवई में हुआ था। जस्टिस नजीर ने लॉ के बाद कर्नाटक हाईकोर्ट में प्रैक्टिस की। 12 मई 2003 को इसके अतिरिक्त न्यायाधीश बने। इसके बाद 24 सितंबर 2004 को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए। 17 फरवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत हुए।

राम मंदिर-बाबरी विवाद पर सुनाया था फैसला
9 नवंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या राम मंदिर-बाबरी विवाद का हिन्दुओं के हक में फैसला सुनाया था। जस्टिस नजीर उस बेंच का हिस्सा थे। बेंच की अध्यक्षता करने वाले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को पहले ही राज्यसभा सांसद बनाया जा चुका है। पीठ में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (वर्तमान में सीजेआई हैं), जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस अशोक भूषण शामिल थे।

अदालत ने यह सुनाया था फैसला
9 नवंबर, 2019 को 134 साल पुराने अयोध्या मंदिर-मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था। तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से यह फैसला सुनाया था। इसके तहत अयोध्या की 2.77 एकड़ की पूरी विवादित जमीन राम मंदिर निर्माण के लिए दे दी गई। शीर्ष अदालत ने कहा था “मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने में ट्रस्ट बने और इसकी योजना तैयार की जाए।” चीफ जस्टिस ने मस्जिद बनाने के लिए मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन दिए जाने का फैसला सुनाया। जो विवादित जमीन की करीब दोगुना है। चीफ जस्टिस ने कहा “ढहाया गया ढांचा ही भगवान राम का जन्मस्थान है और हिंदुओं की यह आस्था निर्विवादित है।”

नोटबंदी के फैसले को सही बताया था
इसके अलावा ही न्यायमूर्ति नजीर की नेतृत्व वाली एक संविधान पीठ ने नोटबंदी को सही मानते हुए बरकरार रखा था। इसके अलावा जस्टिस नजीर संविधान पीठ के कई फैसलों का हिस्सा थे। जिनमें तीन तलाक, निजता का अधिकार और सांसदों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता शामिल है। जस्टिस नजीर ने एक बार कहा था “भारतीय न्यायपालिका की स्थिति आज उतनी गंभीर नहीं है। जितनी पहले हुआ करती थी, हालांकि गलत सूचना के कारण गलत धारणा व्यक्त की जाती है।”

हाईकोर्ट के पूर्व जज ने जस्टिस अब्दुल नजीर का किया समर्थन
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व जस्टिस सखाराम सिंह यादव ने पूर्व जस्टिस अब्दुल नजीर का समर्थन किया है। पूर्व जस्टिस सखाराम सिंह यादव ने कहा “जस्टिस अब्दुल नजीर ने कानून के हिसाब से ही हमेशा फैसले दिए। उनके राज्यपाल बनने से न्यायतंत्र में विश्वास कम नहीं होगा। अगर किसी को लगता है कि उन्हें किसी फैसले का इनाम दिया गया है तो ये बिल्कुल गलत है।”