एडवोकेट कमिश्नर विशाल सिंह ने बताया कि सर्वे की रिपोर्ट गोपनीय है, इसे साझा नहीं किया जा सकता। सर्वे के लिए परिसर के कमरे 29 वर्ष बाद खोले गए हैं। तहखाने के अंदर की बनावट, धार्मिक चिह्न, कलाकृतियों और खंभों की वीडियोग्राफी करवाई गई है। सर्वे के दौरान टीम ने सभी पहलुओं की जांच की है। सर्वे को दौरान दो कमरों के ताले आसानी से खुल गए, लेकिन तीसरे कमरे का ताला तोड़ना पड़ा। दावा किया जाता है कि चार जनवरी 1993 को तत्कालीन डीएम सौरभ चंद्र ने नीचे के तीनों कमरों पर ताले लगवा दिए थे।