
खाने के नाम पर विश्वविद्यालय में हुआ बड़ा घोटाला, खुलासे पर बवाल, कुलपति ने किया कार्रवाई का दावा
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में इन दिनों एक-एक कर बड़े घोटाले हो रहे हैं। इन्हीं घोटालों में अब खाने का घोटाला भी जुड़ गया है। दरअसल, लखनऊ विश्वविद्यालय (Lucknow University) में फर्जी कोटेशन के बलबूते लाखों रुपये डकारने का मामला सामने आया है। यह मामला तब सामने आया जब भुगतान के लिए फाइल कुलपति एसके शुक्ला की टेबल पर पहुंची। कुलपति ने भुगतान रोककर तुरंत मामले की कार्रवाई करने का आदेश दिया।
नियमों की अनदेखी कर जारी किया कोटेशन
मामला अक्टूबर 2019 का है। लखनऊ विश्वविद्यालय में यूजीसी के चेयरमैन प्रो. डीपी सिंह के निर्देशन में दीक्षारंभ नाम से तीन दिवसीय प्रशिक्षण समारोह का आयोजन किया गया था। इसमें लविवि के संस्कृति विभाग में शामिल होने वाले शिक्षकों के लिए भोजना आदि कि व्यवस्था की गई थी। प्रति व्यक्ति खर्च तय करते हुए कमेटी ने कुल अनुमादित खर्च 10 लाख रुपये दिखाया। इसमें से सिर्फ खाने पर 6 लाख रुपये का खर्च दिखाया गया। इस व्यवस्था के लिए तीन कोटेशन लेकर एक फर्म को खाने आदि के इंतजाम की व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई। नियम के अनुसार एक लाख रुपये तक के काम कोटेशन पर और इससे अधिक के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। मगर कमेटी द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए कोटेशन पर काम दे दिया गया।
कार्रवाई का दावा
भुगतान के लिए जब कुलपति ने फाइल खंगाली तो मामले में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। तीन कोटेशन (मेसर्स अंबे कैटर्स, मेसर्स अन्नपूर्णा कैटर्स और मेसर्स अन्नी कैटर्स) में से दो कोटेशन फर्जी पाए गए। वहीं तीनों कोटेशन पर एक ही फोन नंबर लिखा पाया गया। पहली कोटेशन पर जो मोबाइल नंबर है, वही दूसरे पर और दूसरे कोटेशन पर दर्ज मोबाइल नंबर तीसरे पर भी है। अधिक पैसों के लालच में खाने के इंतजाम के नाम पर एक ही व्यक्ति ने अलग-अलग नाम से कोटेशन तैयार किए। मामले का खुलासा होने के बाद लविवि प्रशासन ने सख्ती दिखाकर मामले में कार्रवाई का दावा किया है।
Published on:
01 Dec 2019 03:05 pm
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