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विमुक्त, घुमन्तू , अर्धघुमन्तू जातियों को चिन्हित कर की जाएगी मदद

प्रदेश में इन जातियों (डीएनटी) के कोई भी आँकड़े उपलब्ध नहीं है। इस वर्ग की कुछ जातियां प्रदेश की एससी/एसटी तथा ओबीसी जातियों में समाहित हैं। बाहर जाकर माँगना, घूमना-फिरना तथा शिकार करना इनका मुख्य पेशा है

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Anil Ankur

Aug 30, 2016

Begger tribes of UP

Begger tribes of UP

लखनऊ, उत्तर प्रदेश में विमुक्त, घुमन्तू तथा अर्धघुमन्तू जातियों की समस्याओं का अध्ययन करने, राज्य सरकार द्वारा इन जातियों के लिए चलायी जा रही कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी करने तथा राज्य सरकार को अपने उद्देश्यों से अवगत कराने के लिए राष्ट्रीय विमुक्त, घुमन्तू तथा अर्धघुमन्तू जनजाति आयोग तीन दिवसीय प्रवास पर लखनऊ आया हुआ है। कार्यक्रम के तहत आयोग के अध्यक्ष श्री भीकू रामजी इदाते ने मंगलवार को बापू भवन स्थित सभाकक्ष में प्रमुख सचिव, समाज कल्याण श्री मनोज सिंह के साथ इन जातियों की समस्याओं एवं रणनीतियों के बारे में बैठक की।

जनजाति आयोग के अध्यक्ष ने प्रदेश में इन जातियों को चिन्हित करने तथा इनके लिए कल्याणकारी कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि इन उपेक्षित जातियों की सामाजिक व आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन कर इन्हें समायोजित भी किया जाय। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के कार्यक्रमों/योजनाओं से इनकोे कितना लाभ पहुँचा इसका भी मूल्यांकन किया जाय। उन्होंने इन जातियों की मानीटरिंग के लिए निदेशालय स्तर पर एक नोडल अधिकारी बनाने के भी निर्देश दिये।

उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर इन जातियों के आँकड़े उपलब्ध कराने तथा इनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए निवारण बोर्ड भी बनाया जाय। इसके साथ ही इनके लिए अलग से निदेशालय भी बनाया जाय। उन्होंने बताया कि इन जातियों को कभी भी अंग्रेज पराजित नहीं कर पाये। ये हमेशा स्वतंत्र योद्धा के रूप में रहे तथा इन्हांेने भारतीय संस्कृति का संरक्षण किया। अंग्रेजों ने सन 1871 में क्रिमिनल ट्राइबल एक्ट बनाकर इन जातियों को अपराधशील जातियां घोषित कर दिया तथा समाज से बहिष्कृत कर दिया था। 31 अगस्त 1952 को भारत सरकार ने इनको इस अपराध बोध से मुक्त कर इन्हें विमुक्त जाति बना दिया।

आयोग के सचिव श्री बीके प्रसाद ने कहा कि प्रदेश में इन जातियों (डीएनटी) के कोई भी आँकड़े उपलब्ध नहीं है। इस वर्ग की कुछ जातियां प्रदेश की एससी/एसटी तथा ओबीसी जातियों में समाहित हैं। बाहर जाकर माँगना, घूमना-फिरना तथा शिकार करना इनका मुख्य पेशा है। उन्होंने बताया कि देशभर में लगभग 15 करोड़ इनकी आबादी है, जिन्हें कोई भी नागरिक अधिकार प्राप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि उपेक्षित जातियों को ही विमुक्त, घुमन्तू तथा अर्द्धघुमन्तू जाति कहा जाता है।

उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर इन जातियों का पंजीकरण कराकर इन्हंे भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाय तथा इनके बच्चों का स्कूलों में पंजीकरण भी कराया जाय। उन्होंने कहा कि इन जातियों की सामाजिक व आर्थिक स्थिति का आॅकलन करने तथा जनपदवार इनकी आबादी का सर्वे कराने के लिए राष्ट्रीय आयोग प्रदेश में टीम भेजेगी। उन्होंने बताया कि देश में महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक तथा आंध्र प्रदेश में इन जातियों के आर्थिक व सामाजिक उत्थान के लिए काफी काम किया गया है।

प्रमुख सचिव समाज कल्याण श्री मनोज सिंह ने आयोग के निर्देशों का पालन कराने तथा कमीशन को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की इन डीएनटी जातियों को लाभांवित करने तथा इनके कल्याण के लिए नीतियों का अध्ययन करने के लिए विभागीय अधिकारियों की टीम अन्य प्रदेशों में भी भेजी जायेगी। उन्होंने कहा कि टीम गठित कर शीघ्र ही इन जातियों का सर्वे कराया जायेगा तथा जिलाधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी दी जायेगी। श्री सिंह ने बताया कि प्रदेश में विमुक्त जातियों की पहचान कर कल्याणपुर (कानपुर), फजलगंज (मुरादाबाद) तथा साहबगंज (खीरी) में इनके लिए सेटलमेन्ट काॅलोनी बनायी गई है। इसके साथ ही विमुक्त जातियों के बच्चों के शैक्षिक उत्थान के लिए राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय भी संचालित हैं।