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Girlfriend संग होटल या OYO में जाने से डरते हैं तो आपके काम की है ये खबर, पुलिस नहीं करेगी परेशान

अगर आप अपनी गर्लफ्रेंड के साथ किसी होटल में ठहरे हैं और पुलिस आपसे पूछताछ करने आती है, आपको रोकती है या तंग करती है तो घबराने की जरूरत नहीं है। उस समय क्या करना चाहिए, आइए आपको बताते हैं…

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लखनऊ

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Krishna Pandey

Nov 14, 2022

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18 साल की लड़की और 21 साल के लड़के को अपनी मर्जी से संबंध बनाने और शादी करने का अधिकार है।

9 अक्टूबर, 2022, समयः रात 11 बजे, जगहः लखनऊ के हजरतगंज का OYO होटल। पुलिस की वर्दी में 6 लोग घुसे। हर कमरे से कपल को पकड़ने लगे। जरूरत पड़ी तो लड़कों को पीटा भी। पहले उन्हें थाने ले जाने की बात की। फिर परिवार को वालों को बुलाने की धमकी दी। बाद में कुछ पैसे लेकर मामले को रफा-दफा कर दिया।

ऐसी कहानियां हम सबके पास हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस तरह के मामले में पुलिस से घबराने की कोई जरूरत नहीं है?

अगर आप अपनी गर्लफ्रेंड के साथ किसी होटल में ठहरे हैं और पुलिस आपसे पूछताछ करने आती है, आपको रोकती है या तंग करती है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। आप कुछ कानूनी जानकारी के साथ खुद को डिफेंड कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए हमें कुछ कानूनी जानकारी जानना जरूरी हैं, ‌जो इस तरह हैं…

अनमैरिड कपल एक साथ ले सकते हैं होटल, साथ में रहना कोई जुर्म नहीं
लखनऊ हाईकोर्ट के वकील हेमंत पांडेय बताते हैं कि भारतीय वयस्कता अधिनियम के मुताबिक 18 साल की लड़की और 21 साल के लड़के को अपनी मर्जी से संबंध बनाने और शादी करने का अधिकार है।

बालिग युवक-युवती किसी भी होटल में रूम भी बुक कर सकते हैं। उन्हें अपना आईडी प्रूफ जमा करना होगा। आईडी प्रूफ देने के बाद कोई होटल संचालक रूम बुक करने से मना नहीं कर सकता।
अनमैरिड कपल का होटल में एक साथ रहना कोई जुर्म नहीं है। लिहाजा पुलिस को होटल में ठहरे किसी अनमैरिड कपल को परेशान करने या गिरफ्तार करने का कोई अधिकार नहीं है।

मौलिक अधिकारों का है हनन, जा सकते हैं अदालत
अगर होटल में ठहरने के दौरान अनमैरिड कपल को पुलिस परेशान करती है या फिर गिरफ्तार करती है, तो यह उनके मौलिक अधिकारों का हनन माना जाएगा। पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ कपल संविधान के आर्टिकल 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट या आर्टिकल 226 के तहत सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता हैं।

जानिए, आर्टिकल 32 क्‍या है, इससे क्या फायदा है
आर्टिकल 32 एक मौलिक अधिकार है, जो भारत के प्रत्येक नागरिक को संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त अन्य मौलिक अधिकारों को लागू कराने के लिये सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष याचिका दायर करने का अधिकार देता है।

यानी यह, वह मौलिक अधिकार है जो अन्य मौलिक अधिकारों के हनन के समय, नागरिकों को, उनके हनन हो रहे मूल अधिकारों की रक्षा करने का उपचार प्रदान करता है और इसीआर्टिकल की शक्तियों के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय अपने नागरिकों के मौलिक अधिकार, सुरक्षित और संरक्षित रखता है।

आर्टिकल 226 के फायदे
अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को नागरिकों के मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन अथवा ‘किसी अन्य उद्देश्य’ के लिये सभी प्रकार की रिट जारी करने का अधिकार प्रदान करता है।

लिव-इन-रिलेशनशिप का अधिकार, लोगों को देता है सुरक्षा
अगर कोई कपल्स शादीशुदा नहीं हैं तो भी होटल में जाकर स्टे कर सकता है। उन्हें लिव-इन-रिलेशनशिप में रहने का अधिकार कानून देता है।

लिव-इन-रिलेशनशिप नियम के हैं ये मायने
घरेलू हिंसा अधिनियम (domestic violence act)- 2005 की धारा 2(f) के तहत लिव इन रिलेशनशिप को परिभाषित किया गया है। इसके अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर पुरुष और महिला सालों तक पति-पत्नी की तरह साथ रहते हैं, तो यह अनैतिक नहीं है।
इन नियम का हवाला देकर, खुद को लिव इन पार्टनर बताकर होटल में कमरा ले सकते हैं। इनके ऐसा करने पर किसी भी तरह के कानून का उल्लंघन नहीं होता है। इसलिए पुलिस भी इन पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकती।

आपको होटल देने से कोई मना नहीं कर सकता
होटल में आपको कमरा देना या न देना होटल मैनेजमेंट पर ही निर्भर करता है, लेकिन ऐसा कोई कानून नहीं है जिसमें गैर शादीशुदा कपल को होटल में कमरा लेने की मनाही हो। बस लड़का और लड़की दोनों के पास अपने डॉक्युमेंट्स होना चाहिए।