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आजम पर फिर बिफरे राम नाईक मुख्यमंत्री अखिलेश को लिख दिया कड़ा पत्र

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने उनके सम्बन्ध में संसदीय कार्य और नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खां द्वारा दिये बयानों को अमर्यादित और दायित्वहीन बताते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से इसे तत्काल संज्ञान में लेने के लिए कहा है।

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Raghvendra Pratap

Dec 15, 2016

azam khan and ram naik

azam khan and ram naik

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने उनके सम्बन्ध में संसदीय कार्य और नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खां द्वारा दिये बयानों को अमर्यादित और दायित्वहीन बताते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से इसे तत्काल संज्ञान में लेने के लिए कहा है। राज्यपाल ने यादव को दो पन्ने के लिखे खत में कड़ा एतराज जताते हुए आजम के बयानों को असंवैधानिक, अमर्यादित और दायित्वहीन तक बता डाला है। उन्होंने लिखा “ संसदीय कार्यमंत्री मोहम्मद आजम खां ने नौ दिसम्बर को सार्वजनिक रुप से मेरे विरुद्ध इस आशय को बयान दिया कि मेरे द्वारा राजभवन में अपराधियों, डकैतों, गुण्डों तथा हिस्ट्रीशीटरों को सरंक्षण और आश्रय दिया जा रहा है।”

क्या लिखा पत्र में
पत्र में लिखा है “ मोहम्मद आजम खां ने रामपुर की जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री फैसल खान लाला द्वारा राजभवन में मुझसे की गई मुलाकात का उल्लेख करते हुए मुझ पर दोषारोपण किया है।” नाईक ने मुख्यमंत्री को लिखा है “ राजभवन में मुझसे मिलने के लिए सामान्य नागरिक के अलावा राजनीतिक दलों के लोग समय-समय पर आते रहते हैं और उसी क्रम में जिला कांग्रेस कमेटी, रामपुर के महामंत्री फैसल खान लाला की मुझसे की गयी मुलाकात सामान्य शिष्टता, मेरे संवैधानिक तथा पदीय दायित्वों के विपरीत होना कदापि नहीं कही जा सकती है।”

मेरे विरुद्ध किसी मंत्री का बोलना अमर्यादित
राज्यपाल ने लिखा “ लोगों को सुनना और यदि उनके द्वारा मुझे कोई प्रत्यावेदन आदि दिया जाता है तो उस पर विधि अनुसार समुचित कार्यवाही किये जाने के लिए राज्य सरकार अथवा सम्बन्धित अधिकारी को मरे द्वारा प्रेषित किया जाना संविधान और विधि की दृष्टि से मेरे कर्तव्य की परिधि में आता है। राज्यपाल होने के कारण राज्य सरकार के किसी भी मंत्री को मेरे विरुद्ध सार्वजनिक रुप से उपरोक्त आशय का सर्वथा अमर्यादित एवं अपमानजनक बयान देने का कोई भी संवैधानिक, विधिक अथवा नैतिक अधिकार नहीं है।”

मंत्री के व्यवहार में कोई सुधार नहीं
उन्होंने कहा कि खां द्वारा उनके खिलाफ सार्वजनिक रुप से दिए गए बयान को आपके संज्ञान में लाना जरूरी है कि मंत्रिमंडल के किसी मंत्री द्वारा लिया गया निर्णय, कृत कार्यवाही अथवा सार्वजनिक रुप से दिया गया बयान आदि मंत्रिमंडल के ‘सामूहिक उत्तरदायित्व’ के दायरे में आता है। पूर्व में भी मंत्री मोहम्मद आजम खां द्वारा उनके विरुद्ध सार्वजनिक रुप से दिए जाते रहे बयानों इससे ऐसा प्रतीत होता है कि मंत्री ने मेरे प्रति अपने व्यवहार में सुधार नहीं लाया गया है। इसलिये उक्त मंत्री का उपरोक्त आशय का नितान्त असंवैधानिक, अमर्यादित एवं दायित्वहीन आचरण आपके लिए भी चिन्ता का विषय होना चाहिए।

अखबारों की प्रति पत्र के साथ भेजी
नाईक ने लखनऊ से प्रकाशित प्रतिष्ठित अखबारों के 10 दिसम्बर के अंक की फोटोकापी भी पत्र के साथ संलग्न करते हुये अपेक्षा की है कि मुख्यमंत्री इस मामले को गंभीरता से लेते हुये राज्यपाल जैसी संवैधानिक संस्था की गरिमा एवं मर्यादा को अक्षुण रखे जाने की दृष्टि से अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करें।

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