प्रशांत मिश्रा.
लखनऊ. शाम के चार बजे हैं और मेरे फोन पर एक कॉल आता है। फोन करने वाला अपने आप को डाक विभाग का अधिकारी बताते हुए ये जानकारी देता है कि पिछले दिनों मैने जो पोस्टमैन की पोस्ट के लिए एक्जाम दिया था उसकी कॉपी चेक हो चुकी है जिसमें मैं एक नंबर से फेल हो गया हूं। इसी के साथ वो मुझसे कहता है कि यदि मैं इस एक्जाम में पास होना चाहता हूं तो उसे एक लाख रूपये खर्च करने पड़ेंगे। पचास हजार रूपये पहले और पचास हजार रूपये रिजल्ट आने के बाद।
ये बात सुन कर मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। मैं समझ नहीं पा रहा था कि ये जो व्यक्ति बात कर रहा है ये वाकाई में डाक विभाग का कोई अधिकारी है या कोई मुझे ठगने का प्रयास कर रहा है। मैंने अपनी शंका को शान्त करने के लिए उससे सवाल जवाब किए और अपना रोल नंबर रजिस्ट्रेशन नंबर पूछा जो उसने सब सही-सही बताया, जिसके बाद से मैं सोचने पर मजबूर हो गया कि ऐसा कैसे हो सकता है।
इस व्यक्ति की बातों को सुन कर जहां एक ओर मैं हरान था तो वही दूसरी ओर मेरे मन में ये सवाल खड़ा हो रहा था कि क्या हमारे अधिकारी इतने भ्रष्ट व निडर हो गए है कि फोन कर के पैसे मांगते है या हमारे देश के ठग इतने हाइटेक हो गए है कि वो किसी विभाग की जनकारियों को लीक कर लेते हैं। जिसके आधार पर वो लोगों से ठगी करते हैं। ये वाक्या मड़ियाव के रहने वाले अनुराग द्विवेदी ने पत्रिका रिपोर्टर प्रशांत मिश्रा से बताया जिसके बाद पत्रिका रिपोर्टर ने इस फोन कॉल की पड़ताल की।
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रिपोर्टर ने जब इस व्यक्ति अनुराग के बड़े भाई बन कर बात की तो उसने कहा कि मैं आप का भला करना चाहता हूं, लेकिन ये गलत काम है जिसके चलते मैं पुलिस व प्रशासन के डर से आपको अपना नाम व पता नहीं बता सकता हूं। इसके बाद रिपोर्टर उसे पैसे देने को तैयार हो गया, लेकिन फोन पर बात कर रहे व्यक्ति से पूरी बात निकलवाने के लिए रिपोर्टक ने उससे पूछा कि आप इस काम को अंजाम कैसे देंगे। तो फोन पर बात कर रहे व्यक्ति ने कहां कि मैं डाक विभाग में अधिकारी हूं और ये कॉपियां मेरे ही अंडर में जांची जा रही हैं। आप का भाई एक नंबर से फेल हो गया है लिहाजा हम इसे आसानी से पास कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए आप को मेेरे अकांउन्ट में एक लाख रूपये डलाने होंगे वो भी आज ही क्योंकि आज शाम तक कापियों का रिजल्ट अपडेट के लिए भेजना है। जिसके बाद रिपोर्टर ने पैसे देने की बात स्वीकारते हुए फोन से बात करने वाले का अकाउन्ट नंबर मांग लिया। उस व्यक्ति ने पंजाब नेशनल बैंक व स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का अकाउन्ट नंबर दिया जो दोनों अलग-अलग नाम के व्यक्तियों का था।
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इसके बाद रिपोर्टर ने फोन नंबर 8676005316 व अकाउन्ट नंबर SBI 32086467648, PNB 7839000100011062 के सहारे फोन पर बात करने वाले व्यक्ति की सच्चाई जानने का प्रयास किया तो पता चला कि जिस नंबर से व्यक्ति बात कर रहा था वो बिहार का है और इन्टरनेट पर राजेश सिंह दलाल के नाम पर रजिस्टर दिखा रहा है। साथ ही अकाउन्ट नंबर भी बिहार के थे। एसबीआई घासी राम भगत नाम के व्यक्ति का था और पीएनबी का अकाउन्ट राम कुमार नाम के व्यक्ति का था।
इन जानकारियों के बाद हमें अंदाजा लग गया था कि ये व्यक्ति फोन पर ठगी करने का प्रयास कर रहा था। जिसके बाद जब हमने इससे फिर फोन पर बात की और पैसे देने से मना किया तो पहले तो इसने हमें समझाने व पैसे डालने की राय दी। जब हमने इससे कहां कि हम समझ चुके हैं कि तुम हमसे ठगी करना चाहते हो तो इसने फोन पर ही भद्दी-भद्दी गालियां देना शुरू कर दिया। जब हमने कहा कि मैं पत्रकार हूं और हम तुम्हारी शिकायत करेंगे तो इसने कहां कि मेरा तुम कुछ नहीं कर सकते। मेरा आईजी डीआईजी कुछ नहीं कर सकते तो तुम क्या कर पाओगे।
अब सोचने वाली बात ये है कि आखिर इस तरह के ठगों को विभाग की जनकारियां मिलती कहां से है और इन ठगों में पुलिस व प्रशासन का डर क्यों नहीं है।