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‘भारतीयों को नुकसान नहीं होना चाहिए…’,म्यांमार सीमा पर तनाव को लेकर पीएम मोदी ने जताई चिंता

PM Modi Myanmar Crisis: म्यांमार के राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीमा पार गतिविधियों, शरणार्थियों और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। पीएम ने कहा कि म्यांमार सीमा के पास होने वाली सैन्य कार्रवाई से भारतीयों को किसी तरह का नुकसान नहीं होना चाहिए।

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भारत

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Rahul Yadav

Jun 01, 2026

PM Modi on Myanmar Crisis

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ म्यांमार के राष्ट्रपतियू मिन आंग ह्लाइंग। (फोटो: एक्स/@narendramodi)

PM Modi on Myanmar Crisis: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के साथ हुई द्विपक्षीय वार्ता में भारत-म्यांमार सीमा से जुड़े सुरक्षा मुद्दों और शरणार्थियों की स्थिति पर चिंता जताई। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से म्यांमार में सक्रिय सशस्त्र समूहों की गतिविधियों और उनके भारतीय सीमा क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा उठाया।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने राष्ट्रपति के भारत दौरे पर आयोजित विशेष ब्रीफिंग में बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार के भीतर चल रहे संघर्ष और उससे जुड़े सीमा पार प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सीमा के आसपास सक्रिय सशस्त्र समूहों और उनके खिलाफ म्यांमार सेना की कार्रवाई का असर भारत की सीमा से लगे इलाकों में रहने वाले लोगों पर पड़ रहा है।

सीमा पार गतिविधियों को लेकर जताई चिंता

विदेश सचिव के अनुसार, प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि म्यांमार में सक्रिय समूहों की गतिविधियां भारतीय सीमा के बेहद करीब तक पहुंच रही हैं। इसके जवाब में म्यांमार सेना की सैन्य कार्रवाई भी सीमा के नजदीक होती है, जिसका असर भारतीय क्षेत्र में रहने वाले लोगों पर पड़ता है।

प्रधानमंत्री ने म्यांमार प्रशासन से कहा कि सीमा के पास होने वाली सैन्य कार्रवाई इस तरह की जाए कि भारतीय क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। उन्होंने इस मुद्दे पर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत पर जोर दिया।

शरणार्थियों का मुद्दा भी उठा

बैठक के दौरान म्यांमार से भारत आए शरणार्थियों का मुद्दा भी चर्चा में रहा। विक्रम मिस्री ने कहा कि म्यांमार में जारी संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में लोग मिजोरम पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि शरणार्थियों की वापसी का एक तय तंत्र मौजूद है और इस संबंध में दोनों देशों के अधिकारी लगातार संपर्क में हैं।

उन्होंने कहा कि शरणार्थियों की वापसी का मामला जटिल जरूर है, लेकिन भारत और म्यांमार के बीच इस पर बातचीत जारी है। दोनों देश सामान्य स्थिति बहाल होने के बाद इन लोगों की वापसी के लिए समन्वय कर रहे हैं।

म्यांमार सरकार का क्या है रुख?

विदेश सचिव ने बताया कि म्यांमार सरकार का भी मानना है कि सीमा पार आए लोग स्थायी शरणार्थी नहीं हैं। उनका मानना है कि जैसे ही म्यांमार के प्रभावित क्षेत्रों में हालात सामान्य होंगे, ये लोग वापस अपने घर लौट जाएंगे।

मिजोरम और अन्य सीमावर्ती इलाकों में शरणार्थियों की मौजूदगी को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

चार दिन के भारत दौरे पर हैं म्यांमार राष्ट्रपति

म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग 30 मई से 2 जून तक भारत के चार दिवसीय दौरे पर हैं। सोमवार को नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और म्यांमार राष्ट्रपति के बीच उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता हुई।

बैठक में सीमा सुरक्षा, शरणार्थी मुद्दा, क्षेत्रीय स्थिरता और दोनों देशों के बीच सहयोग को लेकर कई अहम विषयों पर चर्चा की गई। भारत ने स्पष्ट किया कि सीमा क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा और शांति उसकी प्राथमिकता है।