
लखनऊ. प्रदेश के राज्यपाल व कुलाधिपति राम नाईक ने कहा है कि उच्च शिक्षा में खाली पड़े पदों को जल्द ही भरा जाएगा। गुरुवार को उन्होंने अपने अभी तक के कार्यकाल के दौर यूपी की उच्च शिक्षा में हुए साकरात्मक बदलावों को मीडिया के सामने पेश किया। इस दौरान गवर्नर बोले- 'मैं चाहता हूं कि यूपी के विश्वविद्यालयों का स्थान देश के सभी विश्वविद्यालयों के बराबर हो। एक आम धारणा है कि यूपी में उच्च शिक्षा का स्तर अन्य राज्यों की तुलना में कम है और छात्राओं की उच्च शिक्षा को लेकर धारणा थी की इन्हें पढ़ाने की ज्यादा जरुरत नही है। लेकिन जो आंकड़े निकले वो हैरान कर देने वाले हैं। एक परिवर्तन दिखा है। ये परिवर्तन महिला सशक्तिकरण की ओर ले जा रहा है।'
ये हैं आंकड़े
-कुल 15 लाख 60 हज़ार 375 स्टूडेंट्स को उपाधियां 2016-17 में दी गयी। इसमें 51 प्रतिशत छात्राये हैं। जिनमे छात्राओं का दीक्षांत में शिरकत करने का प्रतिशत 57% है।
– जनरल डिग्री में 52%, चिकित्सा विश्वविद्यालय में 39%, प्राविधिक में 23%,कृषि विश्वविद्यालयों में 19%, शकुंतला मिश्र विश्वविद्यालय में 51%, भारतखंडे मे 61% छात्राओं को डिग्री मिली है।
– कुल पदको में 66% छात्राओं को पदक मिले हैं।
लड़कियों की संख्या बढ़ी
गवर्नर रामनाईक ने कहा कि जब 1951 में जनसंख्या की गणना हुई तब पुरुष 27.60 और 8.86 महिलाएं साक्षर थी। 2011 में पुरुष साक्षरता दर 82.14 और महिलाओं की 65.46 हो गयी। साल दर साल हालात सुधरते रहे।रामनाईक ने कहा कि जब मैं राज्यपाल बना तो कहा कि शैक्षिक सत्र नियमित हो। इनका दीक्षांत और परिणाम समय पर हो। पहले जो बैचलर की डिग्री लेट में मिलती थी, अब उनमे सुधार आया है।
दीक्षांत समारोह अब जल्दी होने शुरु हुए
राज्यपाल रामनाईक ने कहा कि उनको जिन 25 कॉलजों में दीक्षांत समारोह करवाना था, उनमें से 23 का हो गया है। बाकी के दो भी होने वाले हैं। मैंने सभी कुलपतियों को कहा था कि भारतीय वेश को विश्वविद्यालयों में पहनाये तो अच्छा होगा, इसे भी सबने स्वीकारा है।
बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ मुहिम रंग ला रही
रामनाईक ने बताया कि अभी 19% महिलाएं कृषि में अच्छी शिक्षा ग्रहण कर रही है। अगर और महिलाएं इस दिशा में आएंगी तो पीएम का सपना पूरा होने में सहयोग मिलेगा। जब अटल बिहारी वाजपई प्रधानमंत्री थे तो सर्व शिक्षा अभियान शुरू हुआ था। इसके बाद पीएम मोदी ने ‘बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ’ की मुहिम शुरू की। इससे महिलाओं और लड़कियों के जीवन में विकास आया है। रिटायर्ड शिक्षकों को यूनिवर्सिटी में रखने के सवाल पर राज्यपाल ने कहा कि अनुभवी शिक्षक मिलना कठिन है। उनकी क्षमता का उपयोग हो। इसलिए ऐसा विचार है।
इन बिंदुओं पर काम करना जरूरी-
1.शिक्षकों के रिक्त पदों को भरा जाना है।
2.विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली पारदर्शी और उत्तरदायी करने के लिए ऑनलाइन प्रणाली का अधिक प्रयोग करना।
3.छात्रों के पेपर को दिखाना।
4.नैक मूल्यांकन को सुनिश्चित किया जाये। महाविद्यालयों में भी नैक मूल्यांकन हो।
5.शिक्षा को रोजगार परक बनाने के लिए शैक्षिक और औद्योगिक संस्थानों के बीच सामंजस्य बढे। इंजीनियरिंग और कृषि में बहुत जरूरत है।
6.शोध के लिए प्रयास हो। पंडित दीन दयाल की स्मृति में रिसर्च चेयर बनाने की दिशा में काम होना चाहिये।
Published on:
05 Jan 2018 07:23 pm
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
