डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे अस्पतालों के साथ ही मरीजों को मिलेगी राहत, नये विशेषज्ञ डॉक्टरों में सबसे अधिक एनेस्थिसियोलॉजिस्ट और गायनेकोलॉजिस्ट ,संबंधित डॉक्टरों से संशोधन के लिए आपत्तियां मांगी गई हैं।
प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की किल्लत झेल रहे सरकारी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल शीघ्र ही अनिवार्य शासकीय सेवा बांड वाले 809 विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवा ले सकेंगे। चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय ने विभिन्न मेडिकल कॉलेजों से पीजी कोर्स कर आने वाले विभिन्न विद्याओं के 809 विशेषज्ञ डॉक्टरों के सेवायोजन की कार्रवाई आरंभ कर दी है। प्रपत्रों की जांच के बाद शीघ्र ही इन विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्तियां काउंसलिंग के माध्यम से सीनियर रेजिडेंट के पद पर की जाएंगी।
प्रदेश के विभिन्न मेडिकल संस्थानों से एमडी, एमएस व एमडीएस कोर्स पूरा करने वाले संबद्ध 809 डॉक्टर्स नीट पीजी 2020 बैच के हैं और उन्होंने अंतिम वर्ष की परीक्षा पूर्ण कर ली । अब उन्हें उनकी ऑल इंडिया रैंकिंग के आधार पर काउंसलिंग के माध्यम से सीनियर रेजिडेंट पद पर समायोजित किया जाना T विभिन्न मेडिकल कॉलेज/विश्वविद्यालय से प्राप्त पीजी उत्तीर्ण छात्रों की सूची पर फिलहाल संबंधित डॉक्टरों से संशोधन के लिए आपत्तियां मांगी गई हैं।
मेडिकल पीजी की पढ़ाई कर पूरी कर अस्पतालों की सेवा में आने वाले उक्त विशेषज्ञ डॉक्टरों में सबसे अधिक 90 एनेस्थिसियोलॉजिस्ट हैं। ओबीएस / गायने, व जनरल सर्जरी, पीडियाट्रिक्स व जनरल मेडिसिन वाले डॉक्टरों की संख्या क्रमश : 93, 89, 75 व 69 है। सबसे कम केवल दो डॉक्टर हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन के हैं तथा तीन-तीन डॉक्टर न्यूक्लियर मेडिसिन और एमडी पीएमआर के हैं।
अनिवार्य शासकीय सेवा बांड वाले इन डॉक्टरों के विभिन्न अस्पतालों में सेवायोजित किये जाने से काफी राहत मिलेगी। लखनऊ में केजीएमयू व अन्य अस्पतालों सहित प्रदेश भर के शासकीय अस्पताल विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी की समस्या से जूझ रहे हैं व मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
अनिवार्य सेवा के तहत इन डॉक्टरों को दो साल तक शासकीय संस्थानों की अपनी सेवाएं देनी हैं। इसके लिए उन्होंने ₹40 लाख का बांड भर रखा है। अनिवार्य सेवा न दिये जाने की स्थिति में उनसे उक्त धन की रिकवरी किये जाने का प्रावधान है।