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सत्संग में बोले गुरु, आत्म ज्ञान कराने वाला ही असल में गुरु

गुरुपूर्णिमा के मौके पर शहर में विभिन्न धार्मिक आयोजन हुए

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Santoshi Das

Jul 19, 2016

shir shri maa anad ashram lucknow

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लखनऊ.गुरुपूर्णिमा के मौके पर शहर में विभिन्न धार्मिक आयोजन हुए। कहीं भंडारा तो कहीं गोमती आरती कर इस दिन को धूम-धाम से मनाया। इस अवसर पर विकास नगर सेक़्टर 13 स्थित श्री श्री मां आनंद आश्रम में गुरु पूर्णिमा उत्सव में भक्तों की भीड़ गुरु वचन सुनने पहुंचे।

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गुरू पूर्णिमा पर्व के अवसर पर सर्वप्रथम कार्यक्रम का शुभाआरम्भ गणेश वन्दना से हुआ। उसके पश्चात आश्रम से जुडे सैकडो भक्तों ने गुरू पूजा की तथा पूज्य गुरू देव श्री हरि शंकर मिश्र ने सबके कल्याण के लिये सामूहिक हवन कराया। इस अवसर पर गुरूदेव पंडित हरिशंकर मिश्र ने भक्तो को गुरू की महत्वता के संबंध में बताया। पूज्य गुरू जी ने बताया कि प्रथम गुरु मां होती हैै तथा दूसरा गुरू शिक्षक होता है। एक गुरु जो व्यवसाय का गुरु होता है तथा एक गुरु सदगुरू होता है। जो गुरु आत्म ज्ञान कराता है वही वास्तव में गुरु की श्रेणी में आता है।

पूज्य गुरू देव जी ने बताया कि गुरू ही सदमार्ग बताता है तथा बिना गुरू के ज्ञान नही है। गुरू के द्वारा ही मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है। आगे बताते हुये गुरू जी ने कहा कि ‘‘गुरू विन भव निधि तरई न कोई। जो विरंच शंकर सम होई’’। गुरू सोते जागते अपने शिष्यो के कल्याण की कामना करता रहता है इसलिये भगवान हनुमान जी की कृपा की तुलना गुरू से की गई है ‘‘जय जय हनुमान गुसाई करहु कृपा गुरू देव की नाई’’ गुरूवाणी के समापन के बाद आश्रम परिसर में उपस्थित भक्तों द्वारा भजन कीर्तन किया गया। गुरुवचन के बाद शाम को विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।

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