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खतरनाक है हेपेटाइटिस सी, हर साल लाखों लोग होते हैं शिकार

एक करोड़ से ज्यादा भारतीय हेपेटाइटिस सी के शिकार हैं।

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लखनऊ

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Akansha Singh

Jul 26, 2018

lucknow

खतरनाक है हेपेटाइटिस सी, हर साल लाखों लोग होते हैं शिकार

लखनऊ. इस दौड़ भाग भरी ज़िन्दगी हर दूसरा इंसान किसी न किसी बीमारी से पीड़ित है। इसका कारण बाहर का प्रदूषण, खानपान, हमारा रहन-सहन है। हाल ही में एक शोध में पता चला है कि एक करोड़ से ज्यादा भारतीय हेपेटाइटिस सी के शिकार हैं। लखनऊ के संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस द्वारा यह रिपोर्ट तैयार की गई है जिसमें यह बताया गया है की एक करोड़ से भी ज्यादा भारतीय हेपेटाइटिस के शिकार हैं। इसका मुख्य कारण प्रदूषण है।

एसजीपीजीआई के डॉ. अमित गोयल का कहना है कि लक्षद्वीप को छोड़कर भारत के अगर सभी राज्यों को मिला लिया जाए तो लगभग 70 प्रतिशत इससे पीड़ित हैं। इन्हें इलाज की सख्त जरूरत है। हेपेटाइटिस के बढ़ने से एचआईवी, हेमोफिलिया जैसी बीमारी के होने की 30 से 40 प्रतिशत आसार अधिक हो जाते हैं। पीजीआई के एक्पर्ट ने बताया है कि हेपेटाइटिस बी और सी के लगभग 2500 पेशेंट गेस्ट्रोएन्ट्रोलॉजी डिपार्टमेंटट में हर साल आते हैं। जिसमें खासतौर से यह देखा गया है इनमें 10 से 12 प्रतिशत पेशेंट लोग एेसे होते हैं जिन्हें बचाना मुश्किल होता है।

हेपेटाइटिस से होने वाली बीमारी

हेपेटाइटिस लीवर में सूजन का कारण बनता है और यह सिरोसिस जैसे गंभीर विकार की वजह भी बन सकता है। इसके अलावा हेपेटाइटिस से पुरुषों में बांझपन का भी खतरा पैदा हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट से पता चला है कि हेपेटाइटिस बी वायरस वाले पुरुषों में बांझपन की आशंका 1.59 गुना अधिक रहती है। हेपेटाइटिस बी वायरस प्रोटीन शुक्राणु की गतिशीलता और शुक्राणुओं की निषेचन दर को कम करने के लिए जाना जाता है। एसजीपजीआई के प्रोफेसल राकेश अग्रवाल ने बताया कि हेपेटाइटिस का अंडाशय या गर्भाशय ग्रंथियों के सामान्य कामकाज पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। हालांकि इस वायरस से पुरुषों में शुक्राणुजनन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे शुक्राणुओं की संख्या, टेस्टोस्टेरोन के स्तर, गतिशीलता और व्यवहार्यता में कमी आती है, जिससे उत्पादकता और प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है।"

ऐसे बढ़ता है खतरा

डॉक्टरों का कहना है कि कुछ लोगों में हेपेटाइटिस-सी का अधिक खतरा होता हैं। इनमें इंजेक्शन के जरिए ड्रग लेने लोग, एक ही सूई से दोबारा इंजेक्शन लेने पर, डोनेट किए गए अनसेफ ब्लड से, डायलिसिस के मरीजों, टैटू बनवाने वाले शामिल हैं। डॉक्टरों का कहना है कि हेपेटाइटिस-सी से बचाव के लिए अभी तक कोई वैक्सीन या टीका नहीं बना है। ऐसे लोग जो इससे पीड़ित हैं, वे इन्फेक्शन के पहले छह महीनों में ही इससे छुटकारा पाकर बीमारी से फ्री हो सकते हैं। लेकिन, ज्यादातर लोगों में यह इन्फेक्शन लंबे समय तक रहता है और उनकी बीमारी क्रोनिक हो जाती है। लेकिन, इस वाइरस को निकाला जा सकता है और इस बीमारी से छुटकारा मिल सकता है। जब आपका शरीर वाइरस फ्री हो जाता है तो आपके जरिए दूसरों में भी इन्फेक्शन फैलने का खतरा कम हो जाता है। इन दिनों देश में सस्ती दवा उपलब्ध है, जिससे इस बीमारी का इलाज पहले की तुलना में कहीं ज्यादा बेहतर और कम खर्च हो रहा है।