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Holi 2018 : होलिका दहन का कई सालों बाद बना शुभ संयोग, ये है तिथि और शुभ मुहूर्त

Holi 2018 : होली के त्योहार पर पूर्णिमा तिथि, प्रदोष काल, भद्राकाल कई सालों बाद तीनों एक साथ पड़ने से शुभ संयोग बना है।  

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Neeraj Patel

Holi 2018 : होली का त्योहार खासतौर पर दो दिनों तक मनाया जाने वाला पर्व होता है। होली मनाने के एक दिन पहले होलिका दहन साल 2018 में 1 मार्च दिन गुरूवार को बड़े धूमधाम से किया जाएगा और 2 मार्च दिन शुक्रवार को होली के दिन रंगोत्सव मनाया जाएगा। जिसे हम सभी धुलण्डी भी कहते हैं। इस बार होली के त्योहार पर पूर्णिमा तिथि, प्रदोष काल, भद्राकाल कई सालों बाद तीनों एक साथ पड़ने से शुभ संयोग बना है। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 1 मार्च 2018 को शाम 07:21 से 09:50 बजे तक रहेगा। शुभ मुहूर्त की अवधि केवल 2 घण्टा 29 मिनट की है।

शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि में ही करना चाहिए। इस साल 1 मार्च को सुबह 8 बजकर 58 मिनट से पूर्णिमा तिथि लग रही है लेकिन इसके साथ-साथ भद्राकाल भी लग रहा है। होलिका दहन की पूजा पूर्णिमा तिथि में प्रदोष काल के दौरान ही करें लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि भद्राकाल के समय होलिका दहन की पूजा न करें।

होलिका दहन की इस प्रकार पूजा करें

होली मनाने से पहले होलिका का दहन करना हिन्दू धर्म में बहुत धार्मिक माना जाता है। हिन्दू धर्म के अनुसार सभी लोग होली पर इस अग्नि में जौ को सेकें और उसे अपने घरों में ले जाएं। हालांकि हर जगह होलिका दहन का अलग-अलग मुहर्त होगा। ऐसा इसलिए होता है कि हर जगह चांद निकले का समय एक नहीं होता। इसलिए सूरज ढलने के बाद ही होलिका का दहन करें। इस दिन महिलाएं एक लोटा जल, चावल, धूपबत्ती, फूल, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, बताशे, गुलाल और नारियल से होलिका का पूजन करें। गर्भवती महिलाओं के लिए होलिका दहन की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। महिलाएं होलिका के चारों ओर कच्चे सूत को सात परिक्रमा करते हुए लपेटें। इसके बाद तीन या सात बार होलिका की परिक्रमा भी करें। जिससे उनका जीवन सुख और समृद्धि से भरा रहे।

लखनऊ निवासी पंडित दिलीप दुवे ने बताया कि भद्राकाल में होलिका दहन व पूजा नहीं करना चाहिए। इससे लोगों को अशुभ फल प्राप्त होता है। भद्राकाल का समय 1 मार्च को शाम 7 बजकर 20 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। इसके बाद ही होलिका दहन व पूजा किया जाना अत्यन्त शुभ रहेगा। वैसे शास्त्रों में बताए गए नियमों के अनुसार इस साल होलिका दहन के लिए बहुत ही शुभ मुहूर्त माना गया है।

धर्म सिंधु नामक ग्रंथ के अनुसार होलिका दहन के लिए तीन चीजों का एक साथ होना बहुत ही शुभ होता है।

1. पूर्णिमा तिथि
2. प्रदोष काल
3. भद्राकाल

इस साल होलिका दहन पर ये तीनों संयोग बन रहे हैं। इसलिए आपके लिए यह होली आनंददायक और शुभ रहेगी। लेकिन इतना ध्यान रहे कि भद्राकाल के समय होलिका दहन व पूजा नहीं की जाती है। भद्राकाल के समय होलिका दहन व पूजा करना अशुभ माना जाता है।