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लखनऊ. शहर की सरकार बन चुकी और अब एकाएक उनकी ज़िम्मेदारी भी बढ़ाई जा रही है। कान्हा उपवन में जानवरों के गोबर, गौ मूत्र आदि उत्पादों की उपयोगिता और इनसे जुड़ी हुई विकास की संभावनाओं पर काम किया जाएगा। इसके लिए एक निजी एजेंसी से भी बात चल रही है। इसकी शुरूआत होने के बाद कान्हा उपवन में जानवरों के भरण पोषण का इंतजाम खुद ब खुद हो सकेगा। प्रदेश में गौशालाओं की उपयोगिताओं को बढ़ाने के लिए गौ सेवी परिवारों का सहयोग लिया जाएगा। राजधानी में अब कान्हा उपवन का संचालन नगर निगम कर रहा है। जानवरों के चारे पर हर महीने करीब 50 लाख रुपए तक का खर्च होता है। इस खर्च की पूर्ति के लिए नए नए तरीकों को अपनाने पर विचार किया जा रहा है।
कान्हा उपवन और अन्य गौशालाओं से व्यक्तियों और संस्थाओं को जोडऩे के लिए महापौर और पार्षदों के नेतृत्व में जनसंपर्क कराए जाने पर भी विचार किया जा रहा है।
नगर निगमों में गौ वंश के रख रखाव के लिए सीएम की अध्यक्षता में बीते दिनों हुई एक बैठक में ये निर्णय लिया गया है। दरअसल गौशालाओं की स्थापना किया जाना है। वहीं इनके संचालन के लिए नगर निगम जनसहयोग प्राप्त करेंगे। गौ सेवी परिवारों को गौशाला के एक या अधिक पशुओं के भरण भोषण पर होने वाले खर्च को वहन करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। मॉडल के रूप में इसकी शुरुआत करने की तैयारी राजधानी में चल रही है।
गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने भी इस बाबत सुझाव प्रमुख सचिव नगर विकास को दिए हैं। उन्होंने कहा है कि जन सामान्य से कान्हा गौशाला से जुडऩे का आह्वïन किया जा सकता है। इसके लिए सम्मलेन कराया जा सकता है। जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों, विषय विशेषज्ञ, गो सेवा आयोग के जरिए गौशालाओं को समस्त सुविधायुक्त बनाते हुए मॉडल गोशालाओं के रूप में विकसित किया जाना है। इसके संचालन की व्यवस्था संस्था के जरिए होने तक नगर निगम खर्च वहन कर रहे हैं। लोगों के जुडऩे पर एक समिति बनाकर कान्हा उपवन का संचालन उन्हें सौंपा जा सकता है।
नगर निगम में अपर नगर आयुक्त अनिल कुमार मिश्रा ने बताया कि कान्हा उपवन को संवारा जा रहा है। इस बात पर भी विचार किया जा रहा है कि गौ मूत्र, गोबर व गौ धोवन का इस्तेमाल एजेंसियों के माध्यम से किया जा सके। इसके लिए एजेंसियों से बातचीत भी चल रही है।
Published on:
26 Dec 2017 02:13 pm
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