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Political Controversy: शंकराचार्य विवाद पर सियासत तेज, लखनऊ में कांग्रेस दफ्तर के बाहर समर्थन में लगे पोस्टर

Shankaracharya Avimukteshwaranand: प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर शुरू हुए विवाद ने अब सियासी रूप ले लिया है। राजधानी लखनऊ में कांग्रेस पार्टी के दफ्तर के बाहर शंकराचार्य के समर्थन में पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें गुरु परंपरा के सम्मान का संदेश दिया गया है।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Jan 25, 2026

शंकराचार्य विवाद पर लखनऊ में सियासत तेज (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

शंकराचार्य विवाद पर लखनऊ में सियासत तेज (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

Shankaracharya Row Turns Political: प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सियासी रंग लेता जा रहा है। इसी कड़ी में राजधानी लखनऊ में कांग्रेस पार्टी के दफ्तर के बाहर शंकराचार्य के समर्थन में पोस्टर लगाए जाने से राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इन पोस्टरों में शंकराचार्य के प्रति समर्थन जताते हुए कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया गया है और संदेश दिया गया है कि ‘गुरु का अपमान करने वाला नरक जाता है’। इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में धर्म, संत समाज और सियासत को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

कांग्रेस दफ्तर के बाहर लगे पोस्टर

लखनऊ स्थित कांग्रेस पार्टी के प्रदेश मुख्यालय के बाहर अचानक लगे इन पोस्टरों ने सबका ध्यान खींच लिया। पोस्टरों में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में नारे लिखे गए हैं और उन्हें सनातन परंपरा का रक्षक बताया गया है। पोस्टर लगने की खबर फैलते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ये पोस्टर शंकराचार्य के सम्मान और गुरु-शिष्य परंपरा की रक्षा के संदेश के रूप में लगाए गए हैं। हालांकि पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पोस्टर किस इकाई या किस नेता के निर्देश पर लगाए गए।

प्रयागराज माघ मेले से शुरू हुआ विवाद

बताया जा रहा है कि यह पूरा विवाद प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान शुरू हुआ था, जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर कुछ बयानों और घटनाओं ने तूल पकड़ लिया। संत समाज के एक वर्ग ने इसे शंकराचार्य पद की मर्यादा से जुड़ा मामला बताते हुए विरोध जताया था। इसके बाद यह मुद्दा धीरे-धीरे धार्मिक दायरे से निकलकर राजनीतिक मंच पर आ गया। संत समाज का कहना है कि शंकराचार्य केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि सनातन धर्म की परंपरा और विचारधारा के प्रतीक हैं। ऐसे में उनके प्रति किसी भी तरह का अपमान पूरे संत समाज और श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है।

सियासत में आया धार्मिक मुद्दा

लखनऊ में कांग्रेस दफ्तर के बाहर पोस्टर लगाए जाने के बाद यह साफ हो गया है कि शंकराचार्य विवाद पर अब सियासी दल भी खुलकर अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट करने लगे हैं। कांग्रेस का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब प्रदेश में पहले से ही कई धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर राजनीति गरमाई हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस इस मुद्दे के जरिए संत समाज और धार्मिक मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। वहीं, विरोधी दल इसे कांग्रेस की ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं।

पोस्टर के संदेश ने बढ़ाई बहस

पोस्टर में लिखे गए वाक्य ‘गुरु का अपमान करने वाला नरक जाता है’ को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। कुछ लोग इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा संदेश बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि इस तरह के शब्द राजनीतिक माहौल को और अधिक संवेदनशील बना सकते हैं। हालांकि, कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि यह संदेश किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता को दर्शाने के लिए है। उनका तर्क है कि भारतीय संस्कृति में गुरु को सर्वोच्च स्थान दिया गया है और उसका सम्मान सभी को करना चाहिए।

अन्य दलों की प्रतिक्रियाएं

शंकराचार्य विवाद और कांग्रेस के इस कदम पर अन्य राजनीतिक दलों की भी नजर है। कुछ नेताओं ने इसे राजनीतिक स्टंट करार दिया है, जबकि कुछ ने कहा है कि धार्मिक मुद्दों को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। भाजपा से जुड़े नेताओं का कहना है कि कांग्रेस अवसर देखकर मुद्दों पर अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश करती है। वहीं, समाजवादी पार्टी और अन्य दलों ने अभी तक इस मामले पर संतुलित रुख अपनाते हुए किसी भी तरह की तीखी टिप्पणी से दूरी बनाए रखी है।

संत समाज की भूमिका

इस पूरे विवाद में संत समाज की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। कई संतों ने शंकराचार्य के समर्थन में आवाज उठाई है और उनके प्रति सम्मान बनाए रखने की अपील की है। संतों का कहना है कि धार्मिक पदों और परंपराओं को राजनीतिक विवादों से ऊपर रखा जाना चाहिए। कुछ संतों ने यह भी कहा कि यदि इस मुद्दे का राजनीतिकरण होता रहा, तो इससे समाज में अनावश्यक तनाव पैदा हो सकता है। ऐसे में सभी पक्षों को संयम और संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।

राजधानी में बढ़ी हलचल

लखनऊ में कांग्रेस दफ्तर के बाहर पोस्टर लगने के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं। किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है। फिलहाल स्थिति शांत बताई जा रही है, लेकिन प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।