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UP में खुलेगा हुक्का बार, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार से नीति बनाने और लाइसेंस बनाने का दिया निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हुक्का पार्लर को संचालित करने का फैसला सुनाया है। इससे अब यूपी में हुक्का बार खुलने का रास्ता साफ हो गया है।

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लखनऊ

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Anand Shukla

Feb 24, 2023

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से हुक्का बार खोलने का आदेश दिया है। इससे यह साफ हो गया है कि एक बार फिर उत्तर प्रदेश में हुक्का बार खुलेगा। कोर्ट ने अपने आदेश में सरकार से हुक्का खोलने पर नीति बनाने और लाइसेंस जारी करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने कहा, "कोविड-19 महामारी प्रतिबंधों में अब काफी हद तक ढील दी गई है। ऐसे में अब इस तरह के व्यवसाय करने वालों को इसे फिर से शुरू करने की अनुमति दी जा सकती है।” यह फैसला एक्टिंग चीफ जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर और जस्टिस एसडी सिंह की डिवीजन बेंच ने सुनाया है।

1 महीने के अंदर फाइल को निपाटाया जाएगा

कोविड काल के दौरान हुक्का पार्लर के संचालन पर लगाई गई पाबंदी भी अब खत्म कर दी गई है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह आशंका जताई गई कि लाइसेंस देने के नाम पर सरकारी अमला मनमाने तरीके से फाइलों को लटका सकता है। इस पर कोर्ट ने सरकार के अधिकारियों से कहा है कि आवेदनों पर 30 दिनों के अंदर विचार कर उस पर फैसला लिया जाए। या तो उसे मंजूर किया जाए या फिर कमियां बता कर रिजेक्ट किया जाए।

यूपी में अवैध रूप से चल रहे हुक्का बार

उत्तर प्रदेश में अभी तक सभी हुक्का बार अवैध रूप से चल रहे थे। इसके लिए अभी तक कोई गाइडलाइन नहीं थी। 2019 में विश्व भर में कोरोना आ गया। इसका असर भारत पर भी पड़ा। हाईकोर्ट ने सितंबर 2020 में कोविड की महामारी के मद्देनजर पूरे यूपी में हुक्का बार पर पूरी तरह पाबंदी लगाए जाने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के इस आदेश पर यूपी सरकार ने नोटिफिकेशन भी जारी किया था। यह मामला तभी से कोर्ट में चल रहा था।

नियमों के मुताबिक हुक्का बार चलाना चाहते हैं- रेस्टोरेंट संचालक

इस बीच कई लोगों ने हुक्का बार चलाने के लिए कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। जिसे कोर्ट ने मंजूर करते हुए सुनवाई की। कई रेस्टोरेंट संचालकों ने कोर्ट में बताया कि वह नियमों के मुताबिक हुक्का बार चलाना चाहते हैं, लेकिन कोई नियम नहीं होने की वजह से उन्हें लाइसेंस नहीं मिलता और उनके आवेदन खारिज हो जाते हैं।

इस पर कोर्ट ने यूपी सरकार से कहा है कि वह हुक्का पार्लर संचालित करने के लिए एक गाइडलइन बनाएं और जो लोग गाइडलाइन का पालन करने को तैयार हो उन्हें लाइसेंस दिया जाए।

वहीं एडिशन एडवोकेट जनरल मनीष गोयल ने इस विषय पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि व्यवसायियों की तरफ ने अभी तक खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत आवेदन नहीं किया है। यदि वे आवेदन करते हैं, तो उनके अनुरोध पर कानून के अनुसार शीघ्रता से विचार किया जाएगा।