10 जून 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

यूपी में अब डीएम तय करेंगे रजिस्ट्री स्टाम्प शुल्क, ऐसे करना होगा आवेदन

यूपी की योगी सरकार के कैबिनेट ने 'सम्पत्ति मूल्यांकन नियमावली- 1997' में संशोधन पर मुहर लगा दी है। अब जिलाधिकारी स्तर से भूमि, मकान, फ्लैट व दुकान आदि भू सम्पत्तियों की खरीद पर लगने वाले स्टांप शुल्क का निर्धारण हो सकेगा।

2 min read
Google source verification
registry stamp duty in up

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की कैबिनेट ने 'सम्पत्ति मूल्यांकन नियमावली- 1997' में संशोधन को मंजूरी दे दी है। अब प्रदेश में जमीन, मकान, फ्लैट व दुकान आदि भू सम्पत्तियों की खरीद पर लगने वाले स्टांप शुल्क का निर्धारण जिलाधिकारी स्तर पर होगा। सरकार का कहना है कि इससे जहां एक तरफ रजिस्ट्री के समय लगने वाला स्टांप शुल्क तय करने में विवाद नहीं होगा तो वहीं दूसरी ओर लोगों को भी खरीदी जाने वाली सम्पत्ति का सही मूल्यांकन पता करने में आसानी होगी। स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रविंद्र जायसवाल का कहना है कि इससे विवाद कम होंगे और इस तरह के मुकदमों की संख्या में भी कमी आएगी। डीएम स्तर से स्टांप शुल्क कैसे तय होगा और इसकी प्रक्रिया क्या होगी, इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।


अब तक प्रदेश में ये व्यवस्था थी कि खरीदार को यह ठीक-ठीक पता नहीं होता था कि उसने जो सम्पत्ति खरीदी है उसपर स्टांप शुल्क कितना लगेगा। खरीदार प्राॅपर्टी डीलर, रजिस्ट्री करवाने वाले वकील, रजिस्ट्री विभाग के अधिकारी से सम्पर्क करता था। मौखिक तौर पर उस भवन या जमीन की कीमत तय हो जाती थी और उसी के आधार पर रजिस्ट्री स्टाम्प शुल्क लगता था।

ऐसी स्थिति में भू सम्पत्ति पर कम और अधिक शुल्क वसूली की शिकायत आम थी। इस तरह के मामले मुकदमेबाजी तक भी खूब पहुंचते थे। अब इस नई व्यवस्था से विवाद और मुकदमे तो कम होंगे ही, राजस्व में भी बढ़ोत्तरी होगी। पक्रिया भी सरल होगी। मंत्री रविंद्र जायसवाल के अनुसार ये व्यवस्था अनिवार्य नहीं बल्कि ऐच्छिक है।


संशोधित नियम के अनुसर अब प्रदेश में यदि कोई जमीन, मकान, फ्लैट या दुकान आदि भूसम्पत्ति खरीदता है तो वह सबसे पहले अपने सम्बन्धित जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर ट्रेजरी चालान के जरिये 100 रुपये फीस कोषागार में जमा कराएगा। डीएम लेखपाल से उस भू सम्पत्ति का सर्किल रेट के हिसाब से मूल्यांकन करवाएंगे। उसके बाद यह तय होगा कि रजिस्ट्री पर कितना स्टाम्प शुल्क लगेगा।