
कांग्रेस के पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव | फोटो सोर्स- patrika.com
Former MLA Mukesh Srivastava: उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित एनआरएचएम (NRHM) घोटाले में विजिलेंस विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई की है। विजिलेंस विभाग ने बहराइच की पयागपुर सीट से कांग्रेस के पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव और दो पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) समेत आठ लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इन सभी पर बलरामपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग के बजट में हेराफेरी करने और सरकारी धन को मिलकर लूटने का आरोप है। इस कार्रवाई के बाद से ही यूपी के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
इस पूरी कार्रवाई के केंद्र में मौजूद मुकेश श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक जाना-माना चेहरा हैं, लेकिन उनका विवादों से पुराना नाता रहा है। मुकेश श्रीवास्तव बहराइच जिले की पयागपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बने थे। हालांकि, साल 2017 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने पाला बदला और समाजवादी पार्टी (सपा) में शामिल हो गए। सपा के टिकट पर उन्होंने चुनाव भी लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
विजिलेंस ने पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति बनाने के मामले में भी मुकदमा दर्ज कर रखा है। इससे पहले सीबीआई मुकेश श्रीवास्तव और उनकी पत्नी पूजा श्रीवास्तव के खिलाफ केस दर्ज कर चुकी है, जिसमें पूर्व विधायक को जेल भी जाना पड़ा था। मुकेश श्रीवास्तव पर पहले से भी कई मुकदमे दर्ज हैं।
विजिलेंस की जांच में सामने आया है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा बलरामपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग के कामों को लेकर हुआ है। साल 2017-18 से 2021-22 के बीच अस्पतालों के रखरखाव और अन्य कार्यों के नाम पर जमकर धांधली की गई। आरोप है कि पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव और आरपी ग्रुप ऑफ कंस्ट्रक्शन के मालिक राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव ने तत्कालीन सीएमओ और विभागीय कर्मचारियों के साथ मिलकर एक सोची-समझी साजिश रची। इन लोगों ने जमीन पर या तो बिल्कुल काम नहीं किया या फिर बहुत कम काम कराकर कागजों पर पूरा भुगतान उठा लिया। साल 2021 में सरकार ने इन गड़बड़ियों की जांच विजिलेंस को सौंपी थी, जिसमें अब पुख्ता सबूत मिलने के बाद यह एफआईआर दर्ज की गई है।
विजिलेंस की शुरुआती जांच में भ्रष्टाचार के बेहद चौंकाने वाले तरीके सामने आए हैं। मेडिकल बिलों को पास करने के लिए डॉक्टरों और बाबुओं ने जमकर कमीशनखोरी की। जांच में पता चला है कि इन बिलों को पास करने के बदले 10 से 25 फीसदी तक की रिश्वत ली गई और बिना किसी ऑफिशियल रजिस्टर में एंट्री किए ही इन्हें धड़ल्ले से पास कर दिया गया। वहीं तत्कालीन सीएमओ डॉ. घनश्याम सिंह पर बेहद गंभीर आरोप है कि उन्होंने मौके पर सिर्फ एक गाड़ी चलाई, लेकिन कागजों में हेरफेर करके तीन गाड़ियां दिखाई और सरकारी खजाने से तीन गुना पैसा निकाल लिया।
Published on:
10 Jun 2026 03:34 pm
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