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‘AIMIM से गठबंधन मुश्किल है’, मुरादाबाद में असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर समाजवादी पार्टी का आया जवाब 

Asaduddin Owaisi UP Offer To Akhilesh Yadav: यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को गठबंधन का प्रस्ताव दिया है। AIMIM से गठबंधन के ऑफर पर समाजवादी पार्टी का बयान सामने आया है।
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लखनऊ

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Mohsina Bano

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Updated: 26 Jul 2026, 7:24 PM IST

Owaisi Akhilesh Yadav alliance Uttar Pradesh

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (बाएं) और सपा सांसद अखिलेश यादव (Photo-IANS)

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने राज्य की राजनीति में बड़ा दांव खेलते हुए अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के सामने गठबंधन का खुला प्रस्ताव रखा है। ओवैसी ने साफ तौर पर कहा है कि उनकी पार्टी का मुख्य और एकमात्र लक्ष्य भारतीय जनता पार्टी को यूपी की सत्ता में वापसी करने से रोकना है। खास बात यह है कि पिछले महज दस दिनों के भीतर यह दूसरा मौका है जब ओवैसी ने सपा की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है।

मुरादाबाद में ओवैसी ने SP को दिया संदेश

शनिवार की रात मुरादाबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने गठबंधन की वकालत की। उन्होंने समाजवादी पार्टी को संदेश देते हुए कहा कि AIMIM गठबंधन के लिए पूरी तरह से तैयार है और आपसी बातचीत शुरू करने का यही बिल्कुल सही वक्त है। अब हमें समानता चाहिए। हमारी लड़ाई कभी किसी धर्म के खिलाफ नहीं रही और न कभी होगी। हमारी लड़ाई हमारी गरिमा और न्याय के लिए है। मैं हाथ मिलाने को तैयार हूं। मैं गठबंधन बनाने को तैयार हूं। यही बातचीत का समय है। आप कहते हैं कि ओवैसी का चुनाव लड़ना हमें नुकसान पहुंचाएगा। मैं आपके साथ मिलकर लड़ने को तैयार हूं।

ओवैसी के ऑफर पर SP ने दिया जवाब

ओवैसी भले ही गठबंधन के लिए आतुर हों लेकिन फिलहाल समाजवादी पार्टी ने उनके इस प्रस्ताव से दूरी बना ली है। सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि AIMIM के साथ गठबंधन की संभावना बहुत ही कम है। समाजवादी पार्टी हमेशा सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की नीति पर काम करती है जबकि ओवैसी की राजनीति एक विशेष विचारधारा तक ही सीमित है। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और पार्टी का उच्च नेतृत्व ही करेगा। गौरतलब है कि ओवैसी ने इससे पहले भी सपा और बसपा दोनों के साथ गठबंधन की इच्छा जाहिर कर चुके हैं।

अखिलेश यादव के सामने है बड़ी चुनौती

अगर अखिलेश इस प्रस्ताव को मान लेते हैं तो BJP इसे कट्टरपंथी गठजोड़ का नाम देकर हिंदू वोटों को अपने पक्ष में एकजुट करने की पूरी कोशिश करेगी। वहीं दूसरी तरफ अगर अखिलेश इस ऑफर को ठुकरा देते हैं तो ओवैसी जनता के बीच जाकर यह संदेश देंगे कि समाजवादी पार्टी मुस्लिम नेतृत्व को कभी आगे नहीं बढ़ाना चाहती। कुल मिलाकर दिल्ली और लखनऊ के इस बदलते सियासी घटनाक्रम के बीच यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अखिलेश यादव ओवैसी की इस राजनीतिक फ्रेंड रिक्वेस्ट का क्या जवाब देते हैं। हालांकि ओवैसी के इस बयान के साथ ही 2027 की सियासी जंग की उलटी गिनती जरूर शुरू हो गई है।