
लखनऊ. रेलवे की पटरी टूटी होने और उसके ऊपर से ट्रेन गुजर जाने की घटना एक बार फिर से सामने आई है। अम्बेडकर नगर जनपद में कटेहरी जनपद के पास ट्रेन की पटरी टूटी होने के बावजूद उसके ऊपर से कई ट्रेनें गुजर गयीं। इससे पहले लखनऊ और कानपुर में भी पिछले दस दिनों में इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। पत्रिका टीम ने यह जानने की कोशिश की कि ऐसे घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे महकमा किस तरह के प्रबंध करता है। उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के एडीआरएम सुरेश कुमार सपरा से पत्रिका संवाददाता ने विस्तृत बातचीत की।
आरपीएफ और ख़ुफ़िया विभाग करता है रेल पटरियों की निगरानी
उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के अपर मंडल रेल प्रबंधक सुरेश कुमार सपरा कहते हैं कि रेल पटरियों पर पड़े छोटे गिट्टीनुमा पत्थर यदि रेल की पटरी पर रख दिए जाएं तो इससे ट्रेन पर कोई असर नहीं पड़ता बल्कि वह टुकड़ा पाउडर की तरह हो जाता है। जब बड़े आकार के पत्थर या टुकड़े किसी साजिश या शरारत में रखे जाते हैं तो उनसे दुर्घटना की संभावना पैदा होती है। ऐसी हरकतों को रोकने के लिए रेलवे सुरक्षा बल और ख़ुफ़िया इकाई सक्रिय रहती है। आरपीएफ लगातार गश्त कर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी करती है।
ट्रेन के पहिये में खराबी से भी चिटक जाती है पटरी
पटरियों के चिटकने की घटनाओं को लेकर एडीआरएम कहते हैं कि पटरियों की निगरानी के लिए एक विशेष कर्मचारी की तैनाती होती है जो हर रोज बारीकी से पटरियों की निगरानी करता है। कई बार पटरियां इसलिए भी चिटक जाती हैं क्योंकि उनके निर्माण के दौरान उनमें मिलाये जाने वाले तत्वों के अनुपात में किसी तरह की कमी रह गई होती है। कई बार ट्रेन के पहियों में किसी तरह की खराबी होने के कारण वह पटरियों को क्षत्रिग्रस्त कर देता है। इन सब स्थितियों पर नजर रखने के लिए रेलवे की एक्सपर्ट टीमें लगातार विभागों में समन्वय स्थापित कर समस्याओं का समाधान करती रहती है।
ड्राइवर को होता है झटके का अहसास
एडीआरम कहते हैं कि पटरियों के चिटकने की घटनाएं अक्सर सर्दी के मौसम में होती हैं। पटरियों में क्रैक होने पर उसके ऊपर से ट्रेन के गुजरने पर ड्राइवर को हलके झटके का अहसास होता है जिसके बाद वह इस बात की सूचना कंट्रोल रूम को देता है। मरम्मत के दौरान ऐसे स्थानों से पटरियों को बेहद धीमी गति से सावधानी के साथ गुजारा जाता है।
Published on:
01 Oct 2017 05:43 pm
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