
Taj Mahal or Tejo Mahalay
लखनऊ. अब सरकार को यह बताना है कि इश्क तथा खूबसूरती का प्रतीक ताजमहल एक मकबरा है या फिर शिवमंदिर। सरकार को यह भी बताना है कि इस नायाब इमारत को मुगल बादशाह शाहजहां ने बनवाया था, अथवा राजपूत महाराज ने मुगल बादशाह को शिवमंदिर के रूप में तोहफा दिया था। इस सवाल का जवाब देने से सरकार को परहेज है। जवाब देने पर नया बखेड़ा खड़ा होना तय है, साथ ही राजनीतिक नफा-नुकसान भी मुमकिन है। सरकार से यह सवाल किया है केंद्रीय सूचना आयोग ने। आयोग से बीते दिनों सूचना अधिकार के तहत कई सवालों के साथ यह जानकारी मांगी गई है कि ताजमहल की हकीकत क्या है।
दक्षिण भारत की अर्जी से हैरान हुआ सूचना आयोग
दरअसल, दक्षिण भारत के बीके एस.आर. अयंगर ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से सूचना अधिकार के तहत पूछा है कि आगरा में संगमरमर से बनी नायाब इमारत ताज महल है या तेजोमय महल। पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने इस अर्जी को केंद्रीय सूचना आयोग के पास भेजा तो सरकार से जवाब मांग लिया गया। केंद्रीय सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलू ने केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय से कहा है कि वह दुनिया के अजूबों में शामिल इमारत के बारे में भ्रम को दूर करने के लिए स्पष्ट करे कि संगमरमर की इमारत को लेकर सरकार का क्या रूख है। सरकार इसे मकबरा मानती है या शिवमंदिर। आयुक्त श्रीधर ने सरकार से इतिहासकार पीएन ओक और योगेश सक्सेना की ताजमहल के इतिहास पर किताब से उपजे विवाद को खत्म करने के लिए कहा है।
सरकार के जवाब से खत्म होंगे तमाम मुकदमे!
केंद्रीय सूचना आयोग ने ताजमहल और तेजोमय महल के विवाद को खत्म करने के लिए सरकार से जवाब मांगने के साथ यह उम्मीद जताई है कि सरकार के रूख स्पष्ट करने से विभिन्न अदालतों और सुप्रीमकोर्ट में ताजमहल के विवाद को खत्म करने में मदद मिलेगी। आयोग ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से कहा है कि वह सरकार के जवाब के आधार पर विभिन्न अदालतों में लंबित मुकदमों में हलफनामे के साथ अपना पक्ष भी रखने की तैयारी में जुट जाए। साथ ही पुरातत्व विभाग से कहा गया है कि वह अपनी खोजपरक जानकारी तथा सरकार के मत को विभिन्न स्थानों से आरटीआई दाखिल करने वालों को उपलब्ध भी कराए।
क्या वाकई राजा मानसिंह ने बनवाया था तेजोमय महल
सूचना अधिकार के तहत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से पूछा गया है कि ताजमहल की हकीकत को साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट किया जाए, क्योंकि जनश्रुति है कि ताजमहल एक मकबरा नहीं है, बल्कि यह शिवमंदिर है, जिसे आदिकाल में तेजोमय महल के नाम से जाना-पहचाना जाता था। इस भव्य इमारत को राजपूत राजा मानसिंह ने बनवाया था, लेकिन बाद में उन्होंने एक संधि के ौरान दौरान मुगल बादशाह शाहजहां को यह नायाब इमारत बतौर तोहफा सौंपी थी। याचिकाकर्ता अयंगर ने इस जानकारी के साथ-साथ इमारत के निर्माण संबंधी तमाम अन्य जानकारियां मांगी हैं।
Published on:
11 Aug 2017 02:02 pm
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
