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लखनऊ में गरजे अखिलेश यादव, ‘शंकराचार्य का अपमान बर्दाश्त नहीं’, BJP की नीतियों पर भी साधा निशाना

Akhilesh Yadav on Shankaracharya controversy : अखिलेश यादव ने लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा संत परंपरा का अपमान स्वीकार्य नहीं है।
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लखनऊ

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Avaneesh Kumar Mishra

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Updated: 15 Feb 2026, 6:08 PM IST

अखिलेश यादव ने कहा संतों का अपमान बर्दाश्त नहीं, pc- x

अखिलेश यादव ने लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा पर तीखा हमला बोला। सपा प्रमुख ने कहा कि देश की आस्था और संत परंपरा का सम्मान होना चाहिए और किसी भी हाल में उसका अपमान स्वीकार्य नहीं है।

अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थक तत्वों द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की जा रही हैं। उन्होंने कहा, 'इन लोगों से आप क्या उम्मीद कर सकते हैं? ये शंकराचार्य की बेइज्जती कर रहे हैं। क्या हमारी औकात है कि हम शंकराचार्य के खिलाफ कुछ कह सकें? क्या इसके लिए भी कोई नया कानून लाएंगे?' सपा प्रमुख ने कहा कि देश की धार्मिक परंपराओं और संत समाज का सम्मान राजनीतिक मतभेदों से ऊपर होना चाहिए।

‘एपस्टीन फाइल’ नहीं की टिप्पणी

अखिलेश यादव ने तथाकथित ‘एपस्टीन फाइल’ मुद्दे पर सीधे टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि यह एक अंतरराष्ट्रीय विषय है और सोशल मीडिया के दौर में कई मुद्दे अचानक सुर्खियों में आ जाते हैं। 'दुनिया तेजी से बदल रही है। कई देशों ने अपने स्वतंत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं। हमें भी डिजिटल स्पेस में सतर्क रहना होगा,' उन्होंने कहा।

अमेरिका को बाजार और रक्षा खरीद पर सवाल

आर्थिक और रक्षा नीतियों पर भी अखिलेश ने केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि अगर भारत 500 बिलियन डॉलर का बाजार अमेरिका को देने की बात करता है, तो ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्किल इंडिया’ जैसी योजनाओं का क्या होगा?

सपा प्रमुख ने हाल की रक्षा खरीद का जिक्र करते हुए Dassault Rafale विमानों की खरीद पर सवाल उठाया और पूछा कि स्वदेशी उत्पादन को कितना बढ़ावा मिल रहा है। 'अगर हम लगातार बाहर से खरीदेंगे, तो घरेलू उद्योग और युवाओं के रोजगार का क्या होगा?' उन्होंने कहा।

अखिलेश यादव ने अपने बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि भाजपा सरकार आस्था, अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता तीनों मोर्चों पर सवालों के घेरे में है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की जिम्मेदारी है कि वह सरकार से जवाब मांगे और जनता के मुद्दों को उठाए।