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हाथरस मामले में एसपी के सस्पेंशन पर भड़का IPS एसोसिएशन, पूछा- डीएम के खिलाफ क्यों नहीं हुआ एक्शन

IPS एसोसिएशन ने कहा कि जब हाथरस के तत्कालीन एसपी पर कार्रवाई हो सकती है तो डीएम पर एक्शन क्यों नहीं लिया गया।

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लखनऊ

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Nitin Srivastva

Oct 04, 2020

हाथरस मामले में एसपी के सस्पेंशन पर भड़का IPS एसोसिएशन, पूछा- डीएम के खिलाफ क्यों नहीं हुआ एक्शन

हाथरस मामले में एसपी के सस्पेंशन पर भड़का IPS एसोसिएशन, पूछा- डीएम के खिलाफ क्यों नहीं हुआ एक्शन

लखनऊ. हाथरस मामले में सिर्फ पुलिस अधिकारियों पर हुई कार्रवाई को लेकर आईपीएस एसोसिएशन में खासी नाराजगी है। आईपीएस एसोसिएशन सूत्रों की के मुताबिक इस केस में सिर्फ पुलिसवालों पर ही एकतरफा कार्रवाई की गई है जबकि पूरे जिला प्रशासन पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। एसोसिएशन ने कहा कि जब हाथरस के तत्कालीन एसपी विक्रांत वीर पर कार्रवाई हो सकती है तो डीएम प्रवीण कुमार पर एक्शन क्यों नहीं लिया गया। मामले में किसी तरह की भी लापरवाही के लिए सिर्फ पुलिस महकमा कैसे जिम्मेदार हो सकता है। जबकि आदेश प्रशासनिक स्तर पर होते हैं और पुलिस महकमा उसे लागू करवाता है। आईपीएस एसोसिएशन के मुताबिक डीजीपी और होम सेक्रेट्री जब मौके पर गए थे तो डीजीपी हितेश अवस्थी ने कहा था कि डीएम के आदेश थे। यानी हाथरस मामले ने आईएएस और आईपीएस एसोसिएशन के बीच दरार पैदा कर दी है।

एसपी पर लगा लापरवाही का आरोप

दरअसल हाथरस मामले की एसआईटी रिपोर्ट में हाथरस के एसपी विक्रांत वीर पर लापरवाही का आरोप लगा था। जिसके बाद यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर मौजूदा एसपी, डीएसपी, इंस्पेक्टर और कुछ अन्य के खिलाफ सस्पेंशन की कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके अलावा आदेश दिया गया था कि सभी का नारको पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया जाएगा। इसमें पीड़िता का परिवार भी शामिल है। हालांकि पीड़िता के परिवार ने नार्को टेस्ट का विरोध किया है।

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सवालों के घेरे में डीएम

आपको बता दें कि हाथरस मामले में वहां कि जिलाधिकारी प्रवीण कुमार भी सवालों के घेरे में हैं। पीड़ित परिवार लगातार डीएम पर धमकाने और दबाव डालने का आरोप लगा रहा है। उन्होंने डीएम को हटाए जाने की भी मांग की है। साथ ही पीड़िता के भाई का कहना था कि हमने कौन सा जुर्म किया है जो हमारे साथ इतनी ज्यादा बदतमीजी हो रही है। वहीं हाथरस कांड की जांच की जिम्मेदारी अब सीबीआई करेगी। हालांकि पीड़ित परिवार का कहना है कि वो न्यायिक जांच चाहते हैं। वहीं पीड़िता के भाई का कहना है कि हम सीबीआई नहीं बल्कि न्यायिक जांच चाहते हैं। हम चाहत हैं कि सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में जांच हो।