
नई जिम्मेदारियों के लिए तैयार प्रशिक्षु (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
लखनऊ स्थित डॉ० सम्पूर्णानन्द कारागार प्रशिक्षण संस्थान, आलमबाग में भव्य दीक्षांत परेड का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रदेश के कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और परेड की सलामी ली। कार्यक्रम में प्रशिक्षु डिप्टी जेलरों के 121 वें सत्र तथा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के प्रशिक्षु जेल वार्डरों के 178 वें सत्र का सफल समापन हुआ।
दीक्षांत समारोह में कुल 119 प्रशिक्षु शामिल हुए, जिनमें 4 अधिकारी संवर्ग (उत्तर प्रदेश) और 115 जेल वार्डर शामिल थे। जेल वार्डरों में 74 उत्तर प्रदेश और 41 उत्तराखंड से थे। यह आयोजन न केवल प्रशिक्षण की पूर्णता का प्रतीक था, बल्कि इन प्रशिक्षुओं के लिए उनके करियर की नई शुरुआत का भी संकेतक बना। संस्थान ने अगस्त 2025 तक कुल 1736 अधिकारियों और 13,391 जेल वार्डरों को प्रशिक्षित किया है। इसके अतिरिक्त, रिफ्रेशर कोर्स के तहत लगभग 1287 अधिकारियों और कर्मियों को भी प्रशिक्षित किया गया है।
परेड ग्राउंड में आयोजित इस समारोह में प्रशिक्षुओं ने अनुशासन, समर्पण और शारीरिक दक्षता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। कदमताल की सटीकता और एकरूपता ने उपस्थित अतिथियों और अधिकारियों को प्रभावित किया। प्रशिक्षुओं ने अपने कठिन प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई तकनीकों और कौशल का प्रदर्शन करते हुए अपनी क्षमता का परिचय दिया।
मुख्य अतिथि दारा सिंह चौहान ने परेड की सलामी लेने के बाद अपने संबोधन में कहा कि कारागार विभाग की जिम्मेदारी केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुधार और पुनर्वास की महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाता है। उन्होंने प्रशिक्षुओं से अपेक्षा की कि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ करें।
उन्होंने कहा कि जेल प्रशासन में कार्य करते समय मानवता और अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। कैदियों के सुधार और पुनर्वास के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में पुनः शामिल हो सकें।
इस अवसर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं को सम्मानित भी किया गया। अधिकारी संवर्ग में सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु का पुरस्कार उत्तर प्रदेश के डिप्टी जेलर शशिकांत को प्रदान किया गया। वहीं जेल वार्डर संवर्ग में उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल की कविता जलाल को सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु घोषित किया गया।
सम्मानित प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र और पुरस्कार देकर उनके प्रयासों की सराहना की गई। इस सम्मान से अन्य प्रशिक्षुओं को भी प्रेरणा मिली और उन्होंने भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने का संकल्प लिया।
संस्थान के अधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षुओं को सुरक्षा प्रबंधन, कानून व्यवस्था, आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने और कैदियों के साथ व्यवहार के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जाती है। यह प्रशिक्षण उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए तैयार करता है।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड के बीच समन्वय और सहयोग की भावना भी देखने को मिली। दोनों राज्यों के प्रशिक्षुओं ने एक साथ प्रशिक्षण प्राप्त कर आपसी सहयोग और अनुभवों का आदान-प्रदान किया, जिससे उनके कार्यक्षेत्र में और अधिक दक्षता आएगी।
दीक्षांत परेड में कई वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षक और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने प्रशिक्षुओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उन्हें अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस दौरान पूरे परिसर में गर्व और सम्मान का माहौल देखने को मिला। यह आयोजन न केवल प्रशिक्षुओं के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव था, बल्कि कारागार विभाग की कार्यक्षमता को और मजबूत करने की दिशा में भी एक अहम कदम साबित हुआ।
अंततः यह कहा जा सकता है कि डॉ० सम्पूर्णानन्द कारागार प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित यह दीक्षांत परेड कार्यक्रम प्रशिक्षुओं के लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक बना। अब ये प्रशिक्षु अपने-अपने पदों पर कार्य करते हुए कारागार व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने में योगदान देंगे।
Updated on:
22 Mar 2026 12:48 pm
Published on:
22 Mar 2026 12:48 pm
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