
एक मुशायरा चल रहा था। जॉन ने मंच पर बैठे दूसरे शायर से गौर देने को कहा और बोले- अरे मैं अमरोहा से आया हुआ हूं। जरा ध्यान से सुनना, वहां होता तो शेख होता। अमरोहा यानी यूपी का वो जिला जहां इस शायर का बचपन बीता और जवानी चढ़ी। आइए आपको इनकी पूरी कहानी बताते हैं।
जॉन एलिया की आज जॉन की पुण्यतिथि है। जॉन आज ही के दिन, 8 नवंबर 2002 को यानी 20 साल पहले दुनिया छोड़ गए थे। जॉन के बारे में एक बात बड़ी मशहूर है कि उनकी शायरी इंटरनेट आने के बाद बड़ी मकबूल हुईं। कहने का मतलब ये है कि शायर के मरने के बाद ही असल में नौजवानों के जहन में आए।
ये बड़ा कम लोग जानते होंगे कि जॉन को लोग पाकिस्तान के शायर के तौर पर जानते हैं। लेकिन उनकी जिंदगी का बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश के अमरोहा में गुजरा है। वो अमरोहा में पैदा हुए और हमेशा खुद को अमरोहा से जोड़ते भी रहे।
जॉन के पिता अमरोहा के प्रभावशाली लोगों में थे। 1931 में पैदा हुए जॉन की जिंदगी के शुरुआती 26 साल अमरोहा में बीते। उनके परिवार के लोग और पुश्तैनी हवेली आज भी शहर में है। बंटवारे के बाद 1957 में जॉन ने पाकिस्तान जाने का फैसला लिया और कराची में बस गए।
जॉन ने सिर्फ 8 साल की उम्र में अपना पहला शेर लिखा था। वो लगातार लिखते रहे लेकिन अपने कलाम को छापने की इजाजत उन्होंने 60 साल की उम्र मे दी। उनकी पहली किताब 60 साल की उम्र में आई और आते ही शायरी के दीवानों में छा गई।
जॉन का लिबास, सिर के बाल और शेर पढ़ने का अंदाज भी अनोखा था। वो लंबे बाल रखते थे और एक मस्ती में मुशायरों में शेर पढ़ते थे। उनके इस अंदाज को आज के लोग यूट्यूब पर खूब देखते हैं।
जॉन की 1991 से 2008 के बीच शायद, यानी, गुमान, लेकिन और गोया नाम से किताबें आईं। जो दुनियाभर में उर्दू-हिन्दी के जानने वालों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
जॉन एलिया ने लेखिका जाहिदा हिना से शादी की थी। उनकी शादी करीब 22 साल चली और 1992 में दोनों अलग हो गए थे। लंबी बीमारी के बाद 8 नवंबर 2002 को कराची में जॉन का निधन हो गया।
जॉन एलिया को दुनिया से जाए 20 साल हो गए हैं लेकिन आज भी उनके चाहने वाले बहुत हैं।
Published on:
08 Nov 2022 07:37 am
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