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महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के पोते के हत्यारों के साथ हुई लखनऊ पुलिस मुठभेड़

खनन कारोबारी के बेटे अंकित का अपहरण करने आए बदमाश महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के पोते अखिलेश के हत्यारे निकले।

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लखनऊ

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Dhirendra Singh

Sep 26, 2017

Kavi Suryakant Nirala Grandson Murder

Kavi Suryakant Nirala Grandson Murder

लखनऊ. खनन कारोबारी के बेटे की हत्या करने आए जिन बदमाशों के साथ लखनऊ पुलिस की मुठभेड़ हुई थी, वह महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' के पोते अखिलेश त्रिपाठी के हत्यारे निकलें। लखनऊ पुलिस को यह जानकारी आरोपियों से पूछताछ के दौरान मिली। वहीं पता चला कि लखनऊ में किडनैपिंग की बारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश पूर्वांचल के एक डॉक्टर को अगवा करने की तैयारी में थे।

महाकवि निराला के पोते की मौत के जिम्मेदार
लखनऊ पुलिस के मुताबिक इलाहाबाद में गत दिनों दारागंज इलाके में कुछ बदमाशों ने एक व्यक्ति की हत्या के इरादे से उस पर गोलियां चलाई और देशी बम फेंका था। लेकिन वह इससे बच गया। हालांकि बम की चपेट में बाजार में मौजूद अन्य लोगों के साथ महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के पोते अखिलेश त्रिपाठी आ गए। बम से निकले छर्रों से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक इस वारदात में भी लखनऊ में मुठभेड़ के बाद पकड़े गए बदमाशों का हाथ था।

अगला निशाना था नामी डॉक्टर
पकड़े गए छह बदमाशों गुड्डा, सनी सोनकर, विनोद शर्मा, रवि, विनोद रावत और राजीव श्रीवास्तव मुंशीपुलिया के कल्याण अपार्टमेंट में रहने वाले खनन कारोबारी विजय गुप्ता के बेटे अंकित का अपहरण करने आए थे। यहां से बदमाश 50 करोड़ तक की फिरौती मांगने वाले थे। वहीं फिरौती न मिलने पर वह अंकित को मारते के लिए भी तैयार थे। इसके बाद इनका अगला टारगेट पूर्वांचल के एक जाने माने डॉक्टर थे। जो कि प्रेक्टिस के लिए इलाहाबाद, वाराणसी, भदोही में भी प्रैक्टिस के लिए जाते रहते हैं। लेकिन इससे पहले ही यह पकड़े गए। पुलिस ने डॉक्टर व उनके परिवार को भी सचेत कर दिया है।

खनन कारोबारी भाजपा पूर्व मंत्री का दामाद
जालौन के खनन कारोबारी विजय गुप्ता का राजनीति से काफी नजदीकी रिश्ता रहा है। वह भाजपा सरकार में मंत्री रहे बाबूराम एमकॉम के रिश्ते में दामाद लगते हैं। विजय के पास फिलहाल 19 खादानें हैं। इसी के चलते बदमाशों ने उनके बेटे अंकित को निशाना बनाया। वहीं बताया जा रहा है कि तत्कालीन कल्याण सिंह सरकार में विजय गुप्ता का नाम खनन माफिया की लिस्ट में डाला जा चुका है।