
टीबी ICU राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति के चेयरमैन बने, गंभीर मरीजों के इलाज की नई गाइडलाइन करेंगे तैयार (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के वरिष्ठ चिकित्सक और टीबी विशेषज्ञ डॉ. सूर्यकांत को देश स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत गठित टीबी ICU राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। यह समिति देशभर में गंभीर टीबी मरीजों के इलाज, ICU प्रबंधन और उपचार व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नई SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) और गाइडलाइन तैयार करेगी।
डॉ. सूर्यकांत की नियुक्ति को टीबी उन्मूलन अभियान और गंभीर क्षय रोगियों के उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उनके नेतृत्व में देशभर के मेडिकल कॉलेजों और बड़े अस्पतालों में टीबी ICU व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की योजना तैयार की जाएगी।
देश में टीबी आज भी गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल है। खासकर ड्रग-रेजिस्टेंट और गंभीर टीबी मरीजों के इलाज के लिए विशेष ICU सुविधाओं की आवश्यकता महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में टीबी मरीजों की हालत इतनी गंभीर हो जाती है कि उन्हें वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सपोर्ट और विशेष निगरानी की जरूरत पड़ती है। ऐसे मरीजों के लिए अब तक एक समान राष्ट्रीय गाइडलाइन की कमी महसूस की जा रही थी। डॉ. सूर्यकांत की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञ समिति अब इसी दिशा में काम करेगी और ICU आधारित टीबी उपचार की मानक व्यवस्था तैयार करेगी।
यह राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के अंतर्गत कार्य करेगी। समिति का उद्देश्य देशभर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में गंभीर टीबी मरीजों के लिए बेहतर ICU सुविधाएं विकसित करना है।
डॉ. सूर्यकांत की इस महत्वपूर्ण नियुक्ति से KGMU में खुशी का माहौल है। विश्वविद्यालय प्रशासन और चिकित्सकों ने इसे संस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है। KGMU की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने डॉ. सूर्यकांत को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने टीबी उन्मूलन और फेफड़ों की बीमारियों के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि डॉ. सूर्यकांत की विशेषज्ञता और अनुभव देशभर के मरीजों के लिए लाभदायक साबित होंगे।
डॉ. सूर्यकांत को विशेष रूप से ड्रग-रेजिस्टेंट टीबी (Drug Resistant TB) के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए जाना जाता है। उन्होंने लंबे समय तक ऐसे मरीजों पर काम किया है जिन पर सामान्य दवाओं का असर नहीं होता। उनके शोध और उपचार पद्धतियों को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे देश में जहां टीबी मरीजों की संख्या अधिक है, वहां ड्रग-रेजिस्टेंट टीबी पर नियंत्रण बेहद जरूरी है।
डॉ. सूर्यकांत केवल चिकित्सा और शोध तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी टीबी मरीजों की मदद में सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने 500 से अधिक टीबी मरीजों को गोद लेकर उनके इलाज, पोषण और देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित की। यह पहल टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत की गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी मरीजों के लिए केवल दवा ही नहीं, बल्कि पोषण और मानसिक सहयोग भी बेहद जरूरी होता है।
भारत सरकार का लक्ष्य देश को टीबी मुक्त बनाना है। इस अभियान में डॉ. सूर्यकांत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। उन्होंने जागरूकता अभियान, शोध कार्य, प्रशिक्षण कार्यक्रम और सामुदायिक स्वास्थ्य गतिविधियों के जरिए टीबी नियंत्रण में उल्लेखनीय योगदान दिया है। कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उन्होंने भारत में टीबी की स्थिति और उसके समाधान को लेकर अपने अनुभव साझा किए हैं।
विशेषज्ञ समिति के गठन के बाद अब मेडिकल कॉलेजों में टीबी ICU को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
जैसी सुविधाओं को बेहतर किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे गंभीर टीबी मरीजों की मृत्यु दर कम करने में मदद मिलेगी।
डॉ. सूर्यकांत की उपलब्धि पर KGMU के डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों और स्वास्थ्य कर्मियों में उत्साह दिखाई दिया। कई चिकित्सकों ने कहा कि यह सम्मान पूरे उत्तर प्रदेश और KGMU के लिए गर्व का विषय है। छात्रों का कहना है कि डॉ. सूर्यकांत का समर्पण और कार्यशैली युवा डॉक्टरों के लिए प्रेरणा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समिति द्वारा तैयार की जाने वाली SOP और गाइडलाइन भविष्य में देशभर के अस्पतालों में लागू की जा सकती हैं। इससे गंभीर टीबी मरीजों के इलाज में एकरूपता आएगी और बेहतर परिणाम मिल सकेंगे।
Published on:
08 May 2026 12:05 am
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