
Knee Implantation Life Will be Double help Of Gamaa Ray
घुटना या कूल्हा प्रत्यारोपण कराएं तो आठ-दस साल बाद यह भी जवाब देने लगते हैं। ऐसे लोगों के लिए बड़ी उम्मीद की खबर है। उत्तर प्रदेश वस्त्र प्रौद्योगिकी संस्थान के एक वैज्ञानिक ने प्रत्यारोपण वाली संरचनाओं की उम्र दूनी करने की तकनीक खोजने का दावा किया है। वैज्ञानिक का कहना है कि गामा किरणों से गुजार दिया जाए तो प्रत्यारोपण के बाद घुटने व कूल्हे दोगुने वक्त तक साथ दे सकते हैं। किरणों का असर ऊपरी संरचना पर नहीं पड़ता और न ही उसकी कीमत बढ़ती है। इस तकनीक का जल्द कॉमर्शियल उपयोग शुरू होगा।
उत्तर प्रदेश वस्त्र प्रौद्योगिकी संस्थान के केमिस्ट्री विभाग के वैज्ञानिक डॉ. शिव गोविंद प्रसाद ने यह रिसर्च की है। उन्होंने बताया कि घुटना व कूल्हा प्रत्यारोपण बढ़ रहा है। प्रत्यारोपण पर भारी खर्च होता है। बनावटी घुटनों व कूल्हों की उम्र बहुत अधिक नहीं होती। मैंने घुटना व कूल्हा में प्रयुक्त पोलीएथिलीन पॉलिमर की संरचना को और मजबूत करने के लिए सात साल पहले रिसर्च शुरू की। अलग-अलग किरणों के प्रभाव देखे। मैंने पाया कि गामा किरणों की एक निश्चित मात्रा से जब इस मैटेरियल को गुजारा गया तो उसकी मजबूती करीब दोगुनी बढ़ गई।
यूजीसी-डीएई सीएसआर कोलकाता ने की पुष्टि
डॉ. प्रसाद के मुताबिक गामा-रे की निश्चित मात्रा से गुजारने के बाद मैटेरियल की मजबूती की जांच की गई। लैब में कई जांच की सफलता के बाद उसे कोलकाता स्थित यूजीसी डीएई (डिपार्टमेंट आफ एटामिक एनर्जी) सीएसआर लैब में टेस्टिंग के लिए भेजा गया। लैब की टेस्टिंग रिपोर्ट में भी मजबूती बढ़ने की पुष्टि हुई है। डॉ. प्रसाद भी पहले न्यूक्लियर साइंटिस्ट थे।
पोलीएथिलीन पॉलिमर से बनते नकली घुटने
डॉ प्रसाद का कहना है कि नकली घुटने व कूल्हे पोलीएथिलीन पॉलिमर के बनते हैं। इस संरचना को गामा किरणों के चैंबर से गुजारा जाता है, जहां एक निश्चित मात्रा में रेडिएशन होता है। रेडिएशन का उस संरचना के बाहरी हिस्से पर कोई असर नहीं पड़ता। लेकिन अंदर जालनुमा संरचना विकसित हो जाती है। जिससे पोलीएथिलीन पालिमर की संरचना की शक्ति बढ़ जाती है। यह शरीर का भार लंबे समय तक ढोने में सक्षम हो जाता है।
Updated on:
12 Apr 2022 05:17 pm
Published on:
12 Apr 2022 05:07 pm
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