
हाई रिस्क मरीजों की जान बचाता है ECMO डिवाइस, जानें इस तकनीक के बारे में
लखनऊ. हाल ही में उत्तर प्रदेश के कानपुर के एसपी सिटी सुरेंद्र दास की संदिग्ध परिस्थितियों में तबीयत खराब होने पर उन्हें शहर के रीजेंसी अस्पताल में एडमिट कराया गया। हालत नाजुक होने की वजह से वहां उनका इलाज ईसीएमओ मशीन की मदद से चल रहा है, ताकि वो सही तरीके से सांस ले सकें।
क्या होती है ईसीएमओ डिवाइस
एक्स्ट्रा-कॉरपोरियल मैम्ब्रेन ऑक्सीजेनेयसन यानि कि ECMO डिवाइस लाइफ सपोर्ट सिस्टम कहलाता है। यह शरीर को उस वक्त ऑक्सीजन सप्लाई करता है, जब मरीज के फेफड़े या दिल काम नहीं कर पाते हैं। जब मरीज को प्राकृतिक तरीके से सांस लेने में परेशानी हो रही हो, तब ईसीएमओ डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है।
इस तरह फंक्शन करती है ईसीएमओ डिवाइस
ईसीएमओ का इस्तेमाल तह किया जाता है जह मरीज को सांस लेने में परेशानी हो। यह मशीन नसों में बह रहे खून के जरिये काम करती है। इसमें शरीर के किसी एक नस से खून निकालकर उसे मशीन से जोड़ दिया जाता है जिससे कि बायपास तरीके से खून पूरे शरीर में प्रवाहित होता है। यह मशीन खून को हार्ट और लंग से भी बायपास करने देती है। जब पेशंट को ईसीएमओ से कनेक्ट किया जाता है, तह ट्यूबिंग के जरिये खून का प्रवाह लंग में होता है, जिससे यह मशीन खून में ऑक्सीजन जोड़ती है और कार्बन डाइऑक्साइड को हटा देती है। ऐसा करने से बॉडी टेम्प्रेचर के हिसाब से खून गर्म होता है और शरीर में वापस पंप किया जाता है।
ईसीएमओ मशीन उन मरीजों की जान बचाने के काम आती है जिन्हें वेंटिलेटर से भी राहत नहीं मिलती है। केजीएमयू के डॉक्टर अविनाश अग्रवाल ने बताया कि ईसीएमओ के जरिये दिल के हाई रिस्क मरीजों के सफल ऑपरेशन की संभावनाएं होती हैं। हार्ट अटैक होने की वजह से दिल की मांसपेशियां खराब हो जाती हैं। सर्जरी के बाद भी खतरा बना रहता है। उन्होंने बताया कि सही तरह से पंपिंग न होने से फेफड़ों में खून नहीं पहुंचता है, जिससे फेफड़े काम करना बंद कर देते हैं। ऐसे में ईसीएमओ मशीन की मदद से फेफड़ों में ऑक्सीजन पहुंचाया जाता है, जिससे कि मरीज की हालत में सुधार होता है।
ईसीएमओ से 70 फीसदी मरीजों की बचती है जिंदगी
डॉक्टर अविनाश अग्रवाल ने बताया कि ईसीओमओ के जरिये 70 फीसदी हाई रिस्क मरीजों की जिंदगी बचाया जा सकता है। इस मशीन को चलाने के लिए ट्रेंड स्टाफ की जरूरत होती है। इस मशीन की कीमत करीब 30 से 35 लाख है।
इन मरीजों को मिलती है ECMO तकनीक की मदद
Updated on:
08 Sept 2018 02:41 pm
Published on:
08 Sept 2018 02:11 pm

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