
काकोरी के बाबू त्रिलोकी सिंह इंटर कॉलेज में स्पर्श कुष्ठ जागरुकता अभियान का आयोजन किया गया
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ. अगर त्वचा पर हल्के या तांबई रंग के धब्बे हों और उनमें संवेदनहीनता हो तो यह कुष्ठ रोग हो सकता है। इसके अलावा हाथ या पैरों में अस्थिरता या झुनझुनी, नसों में दर्द, कान या चेहरे पर सूजन, हाथ या पैरों पर सुन्नता या घाव होना भी कुष्ठता के लक्षण हैं। ऐसा होने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक को दिखाना चाहिए। स्पर्श कुष्ठ जागरुकता अभियान के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) काकोरी में एनएमए (नॉन मेडिकल एसिस्टेंट) धर्मेन्द्र दीक्षित ने लोगों को यह जानकारी दी। वहीं, अधीक्षक डॉ. पिनाक त्रिपाठी ने बताया कि यह बात ध्यान देने वाली है कि हर दाग कुष्ठ रोग नहीं होता है।
जादूगर द्वारा जादू के माध्यम से सभी को जागरूक किया गया। इस अवसर पर (बीसीपीएम) प्रद्युम्न कुमार मौर्या ने वहां पर उपस्थित लोगों को बताया कि समय से पहचान एवं नियमित उपचार से कुष्ठ रोग पूर्ण रूप से ठीक हो जाता है। सीएचसी काकोरी सहित प्रदेश के सभी सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर एमडीटी निःशुल्क उपलब्ध है।
Published on:
07 Feb 2021 05:02 pm
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