
लखनऊ. एलडीए भविष्य में ऐसी तकनीक से मकान बनाएगा, जिसमें ईंटों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। प्री-कॉस्ट तकनीक से बनाए जाने वाले इन फ्लैटों में सीपेज, दरार की कोई समस्या नहीं रहेगी। यही नहीं फ्लैट अथवा मकान बनाने में 60 फीसदी समय की भी बचत होगी। इस तकनीक की खास बात यह भी है कि अधिक संख्या में मकान बनाने में लागत कम आएगी। इससे पीएम और सीएम की घोषणा के अनुरूप तय समय तक अधिक से अधिक आवास बनाए जा सकेंगे। राजधानी में इस प्रकार की तकनीकी से पहली बार आवास बनाए जाएंगे। एजेंसी ने एलडीए को प्रस्ताव दिया है। प्रस्ताव को लेकर परीक्षण किया जा रहा है।
हाउसिंग बोर्ड के मकानों में सीपेज व दरारों की समस्या आम है। इसका कारण घटिया सामग्री के उपयोग को बताया जाता है। भविष्य में इन मकानों से लोगों को शिकायत नहीं होगी। प्री-कास्ट तकनीक से मकान बनाने की शुरूआत राजधानी से होने वाली है। इस तकनीक के इस्तेमाल से किसी भी मौसम में घर का निर्माण किया जा सकता है। प्री-कास्ट तकनीक से मकान बनाने पर 60 फीसदी से अधिक समय की बचत भी होती है। इसे इस प्रकार से समझ सकते हैं अगर किसी प्रोजेक्ट को पारंपरिक निर्माण विधि से पूरा होने में 11 महीने का समस लगता है तो वह परियोजना प्री-कास्ट तकनीक की मदद से केवल 4 महीने में पूरी हो सकती है। एलडीए के मुख्या अभियंता इंदु शेखर सिंह ने बताया कि प्री-कास्ट(क्यूबिकल) तकनीक का इस्तेमाल करने पर एक दिन में लगभग 5-6 मकान बनाए जा सकते हैं। पारंपरिक विधि की तुलना में प्री-कास्ट तकनीक से बने मकान बेहतर गुणवत्ता वाले होते हैं। लखनऊ में भी भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल किए जाने की कवायद हो रही है। कानपुर विकास प्राधिकरण से एलडीए में तैनात होने के बाद मु य अभियंता से कई एजेंसियों ने स पर्क किया है। जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा।
क्या है प्री-कास्ट तकनीक
इस तकनीक से मकान बनाने में ईंट की जरूरत नहीं पड़ती है। इसमें बीम, कॉलम, पैनल, स्लैब और कंक्रीट का इस्तेमाल किया जाता है। इस तकनीक से निर्मित मकान बिल्कुल पारंपरिक घर जैसा ही लगता है। साथ ही इनकी मजबूती को किसी प्रकार समझौता नहीं होता है। खास बात यह है कि प्री-कास्ट तकनीक के इस्तेमाल से किसी भी मौसम में घर का निर्माण किया जा सकता है।
वायरिंग, प्ल िबंग कराने की नहीं होगी जरूरत
इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे लैट अथवा मकान के अंदर का क्षेत्रफल बढ़ जाएगा। इस तकनीक से बने घरों में डे्रनेज, वाटर सप्लाई, इलेक्ट्रिक वायरिंग, प्ल िबंग कराने की जरूरत नहीं होती है कारण कि प्री-फैब स्ट्रक्चर में यह सब पहले से मौजूद होता है।
नहीं होता कंपन, जंग भी नहीं लगती
इस तकनीक की मदद से स्पोट्र्स स्टेडियम, हॉल आदि का भी निर्माण किया जा सकता है। इसमें कोई वाइब्रेशन या फिर आवाज नहीं होती है। इस तकनीक से मकान बनाने से समय की भी बचत होती है। इसकी मटेरियल पर जंग नहीं लगती है। यानी कि किसी भी मौसम का इस पर कोई असर नहीं पड़ता। अपनी जरूरत और सुविधा के हिसाब से प्री-कास्ट स्ट्रक्चर को ढाला जा सकता है।
बालागंज व में प्रस्तावित है पीएम आवास योजना
पीएम आवास योजना में वर्ष 2022 तक सबको छत मुहैया कराने का पीएम व सीएम का सपना है। राजधानी में करीब दो लाख बेघरों को घर देने के लिए इस तकनीक से कम समय में अधिक से अधिक मकान बनाए जा सकते हैं। हरदोई रोड व बालागंज में पीएम आवास बनाने की कार्ययोजना प्रस्तावित है। यहां पर लगभग जी प्लस फोर में लगभग 2150 लैट बन सकेंगे। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत इन लैटों के लिए 2.50 लाख रुपए अनुदान मिलेगा। प्री-कास्ट तकनीक के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर जल्द काम शुरू किया जा सकता है।
एलडीए मुख्य अभियंता इंदु शेखर सिंह प्री कास्ट तकनीक से मकान बनाने की शुरूआत दूसरे प्रदेशों में हो गई है। इस तकनीक में ईंट की जरूरत नहीं पड़ती। क्यूबिकल सेप में किसी एक स्थान पर दीवारों को ढालकर प्री कास्ट किया जाता है। इस तकनीक से मकान बनाने को लेकर एजेंसियों ने स पर्क किया है। अभी तकनीक पहलुओं का परीक्षण के बाद फैसला लिया जाएगा।
Published on:
19 Dec 2017 10:47 pm
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