
लिवर की बीमारी से हैं परेशान तो चले आइए KGMU, प्लाज्मा फेरेसिस तकनीक मरीजों के लिए वरदान
लखनऊ. सौ बरस के किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (King Geroge medical University) ने कामयाबी का नया झंडा फहराया है। केजीएमयू में प्लाज्मा फेरेसिस शुरू हो गई है। इससे लिवर के मरीजों को काफी राहत मिली है। केजीएमयू में चार माह में 12 मरीजों की प्लाज्मा फेरेसिस की गई है, जिसमें 10 का इलाज सफल रहा।
लिवर रोगियों के लिए प्लाज्मा फेरेसिस
केजीएमयू के मेडिसिन विभाग के डॉ. डी हिमांशु और एसजीपीजीआई के गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभाग के डॉ. अमित गोयल ने मिलकर इसकी शुरुआत की है। यह उन मरीजों के लिए है, जिन्हें भविष्य में लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत हो सकती है। ऐसे मरीजों को प्लाज्मा फेरेसिस से बचाया जा रहा है। दरअसल, प्लाज्मा फेरेसिस से धीरे-धीरे मरीजे के लिवर की रिकवरी होने लगती है। वह धीरे-धीरे ठीक होने लगता है। हालांकि, इसकी दर अभी काफी कम रही है। चार में से एक मरीज के बचने की संभावना रहती है।
डॉ. ने बताया कि प्लाज्मा फेरेसिस से युवा मरीजों की रिकवरी ज्यादा होती है। उम्रदराज मरीजों को ज्यादा समय लगता है। वहीं, इस प्रक्रिया में एक बार में छह हजार रुपये का खर्च आता है।
क्या है प्लाज्मा फेरेसिस
लिवर खराब होने या उसमें दिक्कत होने पर व्यक्ति को पीलिया हो जाता है। इसका असर ब्लड में रहता है। इसलिए मरीजों के ब्लड से प्लाज्मा को पूरी तरह निकाला जाता है। केजीएमयू के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग में फेरेसिस मशीन लगी है, जिसमें मरीज का ब्ल़ड जाता है और उसमें से प्लाज्मा को छानकर शेष ब्लड दोबारा मरीज को चढ़ा दिया जाता है। एक मरीज में करीब 15 यूनिट प्लाज्मा की आवश्यक्ता होती है।
प्लाज्मा फेरेसिस किसके लिए कारगार
यह उन मरीजों के लिए कारगार है जिनका लिवर इंफेक्शन, टॉक्सीसिटी, वायरल इंफेक्शन, हेपेटाइटिस-बी व ई या अल्कोहल से खराब हो जाता है। वहीं, जो मरीज एक्यूट लिवर फेल्योर, एक्यूट ऑन क्रोनिक लिवर फेल्योर और लिवर सिरोसिस से पीड़ित होते हैं उनके लिए प्लाज्मा फेरेसिस कारगार नहीं होता।
Published on:
15 Jul 2019 04:59 pm
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