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अमिताभ ठाकुर ने लोकायुक्त को ही बताया भ्रष्ट, लगाया पैसा लेने का आरोप

लोकायुक्त ने अमिताभ ठाकुर के खिलाफ भ्रष्टाचार, मनीलॉन्ड्रिंग और कॉपरेटिव सोसाइटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज़ करवाकर इसकी जांच सीबीआई ईडी से कराए जाने की सिफारिश मुख्यमंत्री से की है।

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Kaushlendra Singh

Aug 27, 2015

Amitabh Thakur IAS

Amitabh Thakur IAS

लखनऊ। लोकायुक्त जस्टिस एनके महरोत्रा ने निलंबित आईपीएस अमिताभ ठाकुर के खिलाफ भ्रष्टाचार, मनीलॉन्ड्रिंग और कॉपरेटिव सोसाइटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज़ करवाकर इसकी जांच सीबीआई ईडी से कराए जाने की सिफारिश मुख्यमंत्री से की है।

लोकायुक्त ने मंगलवार को अमिताभ ठाकुर की जाँच से संबंधित रिपोर्ट सिफारिशों के साथ मुख्यमंत्री मुख्य सचिव सतर्कता को भेजी है, रिपोर्ट की एक प्रति लोकायुक्त ने प्रमुख सचिव गृह को भी भेजी है। जिसके बाद गुरुवार को अमिताभ ठाकुर ने कहा है कि वो लोकायुक्त एन के महरोत्रा के खिलाफ हाईकोर्ट जायेंगे।

अमिताभ ठाकुर ने लोकायुक्त पर आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि लोकायुक्त ने गाज़ियाबाद से गोरखपुर तक कई मामलो में जांच के दौरान पैसा लिया है और खुद ही भ्रष्ट हैं।

जानिए, अमिताभ ठाकुर पर कौन-कौन से हैं आरोप

- लखनऊ के खरगापुर में ठाकुर दंपती, उनके एनजीओ व माता-पिता, भाई के नाम पर 72802 वर्ग फीट जमीन है। जिन सहकारी समितियों से यह जमीन खरीदी गई, वे परिवार के सिर्फ एक सदस्य को अधिकतम 2152 वर्ग फीट जमीन बेच सकती हैं।

- बाराबंकी में अमिताभ ठाकुर के पिता, मां व परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर संपत्ति।

- ममता सहकारी गृह निर्माण के सचिव पद पर डिंकर सिंह के रहते हुए नूतन ठाकुर ने लखनऊ के खरगापुर में 2517.881 वर्ग मीटर भूमि खरीदी लेकिन बाउंड्री बनाकर कब्जा 40,000 वर्ग मीटर पर किया।

- जमीनों पर अवैध कब्जा खाली कराने का प्रयास करने पर जेल भिजवाने की धमकी दी।

- अमिताभ ठाकुर ने सेवा में रहते हुए 140 रिट याचिकाएं दाखिल कीं। कई याचिकाओं में पत्नी के साथ सहयाची।

लोकायुक्त सिफारिश

- अमिताभ ठाकुर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, भारतीय दण्ड संहिता (आइपीसी), मनीलांड्रिंग एक्ट, उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव एक्ट के नियमों के अन्तर्गत एफआइआर दर्ज कराकर पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई व प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को सौंपी जाए।

- आईजी (कार्मिक) अभय कुमार प्रसाद द्वारा सात जुलाई 2012 को अमिताभ के खिलाफ दिए गए सतर्कता जांच के आदेश पर अमल कर अति शीघ्र खुली जांच पूरी करायी जाए।

- अमिताभ के खिलाफ शिकायत दाखिल करने वाले के इल्जामों में डीएम लखनऊ, डीएम बाराबंकी की रिपोर्ट व राजीव वाजपेयी द्वारा दाखिल शिकायत को शामिल किया जाए।

- नेशनल आरटीआई फोरम, पीपुल्स फोरम, पीकेओएमजी ट्रस्ट, इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एण्ड डॉक्यूमेंटेशन इन सोशल साइंस और आरटीआई फण्ड में अमिताभ ठाकुर व उनकी पत्नी नूतन ठाकुर अथवा दोनों किस रूप में शामिल हैं, इसके लिए इन एक दर्जन से अधिक बैंक खातों की जांच की जाए। यह भी देखा जाए कि धन के स्रोत क्या हैं।

- वाद 'अमिताभ ठाकुर बनाम इलाहाबाद उच्च न्यायालय' में पारित निर्णय के आधार पर शीघ्र जांच पूरी की जाए और अगर अमिताभ ठाकुर या उनके परिवार का कोई सदस्य याचिका दाखिल करने में 'ट्रेडिंग' करता पाया जाए तो पता लगाया जाए कि याचिका दाखिल करने व अन्य फोरम पर शिकायत के लिए किन स्रोतों से धन हासिल हुआ।

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