रामलला के सखा त्रिलोकी नाथ पाण्डेय का निधन

- अयोध्या के श्रीराम मंदिर विवाद में आए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में त्रिलोकी नाथ पाण्डेय की पैरोकारी महत्वपूर्ण

By: Sanjay Kumar Srivastava

Published: 25 Sep 2021, 08:42 AM IST

लखनऊ. सुप्रीम कोर्ट की ओर से रामलला के अभिन्न मित्र (next best friend of Ram Lalla Lucknow) घोषित त्रिलोकी नाथ पाण्डेय (Triloki Nath Pandey) (75 वर्ष) नहीं रहे। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। काफी दिनों से डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल लखनऊ में भर्ती थे जहां उन्होंने शुकवार देर शाम अंतिम सांस ली। विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा ने बताया कि, उनका शव पहले कारसेवक पुरम लाया जाएगा इसके बाद बलिया स्थित उनके पैतृक गांव ले जाया जाएगा और वहीं उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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राम मंदिर में त्रिलोकी नाथ की भी पैरोकारी महत्वपूर्ण :- त्रिलोकी नाथ पाण्डेय छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए थे। संघ के माध्यम से ही वे विहिप में भेजे गए और मंदिर आंदोलन के सहयोगी के रुप में उन्होंने छाप छोड़ी। आंदोलन के प्रति उनका समर्पण और उनकी समझदारी को देखते हुए पूर्व न्यायमूर्ति देवकीनंदन अग्रवाल के निधन के बाद दो दशक पूर्व उन्हें विहिप की ओर से अदालत में रामलला के सखा के तौर पर नामित किया गया। 9 नवंबर 2019 को रामलला के हक में आए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में उनकी भी पैरोकारी महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालांकि निर्णय आने के बाद वे जीत का जश्न ठीक से नहीं मना सके और तभी से वे बीमार चल रहे थे।

अद्भुत समन्वय की वजह से मशहूर थे :- श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट महासचिव चंपत राय ने बताया कि मूलत: बलिया में जन्मे त्रिलोकी नाथ पाण्डेय बाल्यावस्था से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सम्पर्क में आए। 1972 में संघ के जिला प्रचारक और संगठन की ओर से 1979 में विश्व हिन्दू परिषद के संगठन मंत्री बने। वह संगठन की ओर रामलला के सिविल व सीबीआई के मुकदमों के पैरोकारी करते थे। संतों और अधिवक्ताओं के बीच अदभुत समन्वय बनाने की वजह से वह मशहूर थे।

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