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Yogi सरकार ने शुरू की डिजिटल जनगणना 2027, अब मोबाइल से खुद दर्ज करें अपनी जानकारी

UP Census 2027: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनगणना-2027 के प्रथम चरण की शुरुआत करते हुए प्रदेशवासियों से सही जानकारी देने की अपील की। पहली बार डिजिटल और जातीय जनगणना के साथ वन ग्राम भी शामिल होंगे।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

May 07, 2026

जनगणना केवल हेड काउंट नहीं, समग्र और समावेशी विकास का आधार है” - मुख्यमंत्री योगी (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

जनगणना केवल हेड काउंट नहीं, समग्र और समावेशी विकास का आधार है” - मुख्यमंत्री योगी (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

CM Yogi Launches Census 2027 First Phase in UP: उत्तर प्रदेश में जनगणना-2027 की औपचारिक शुरुआत हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में जनगणना-2027 के प्रथम चरण का शुभारंभ किया। ‘हमारी जनगणना-हमारा विकास’ के संकल्प के साथ शुरू हुए इस अभियान के तहत मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य प्रारंभ किया गया।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि जनगणना केवल लोगों की संख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह समग्र, समावेशी और सुनियोजित विकास की मजबूत नींव है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे जनगणना को राष्ट्रीय दायित्व मानते हुए इसमें सक्रिय भागीदारी करें और सही जानकारी उपलब्ध कराएं।

पहली बार होगी डिजिटल और जातीय जनगणना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश में पहली बार डिजिटल जनगणना कराई जा रही है। इस बार जनगणना को तकनीक से जोड़कर अधिक पारदर्शी, प्रभावी और तेज बनाया गया है। उन्होंने बताया कि इस जनगणना में पहली बार जातीय गणना को भी शामिल किया गया है। साथ ही वन ग्रामों को भी पहली बार जनगणना प्रक्रिया में सम्मिलित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे समाज के हर वर्ग और क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का सही आंकलन हो सकेगा और योजनाएं अधिक प्रभावी तरीके से तैयार की जा सकेंगी।

7 से 21 मई तक मिलेगा स्वगणना का विकल्प

मुख्यमंत्री ने बताया कि आम नागरिकों को 7 मई से 21 मई 2026 तक स्वगणना का विकल्प उपलब्ध कराया गया है। इसके तहत लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद जनगणना कार्मिक घर-घर जाकर मकानों और परिवारों का सूचीकरण करेंगे। दूसरे चरण में प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत गणना की जाएगी। सरकार का मानना है कि स्वगणना सुविधा से लोगों की भागीदारी बढ़ेगी और डेटा अधिक सटीक रूप से उपलब्ध हो सकेगा।

“डेटा आधारित निर्णयों का है वर्तमान युग”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज का समय डेटा आधारित निर्णयों का है। जनगणना से प्राप्त आंकड़े सरकार को विकास योजनाएं बनाने में महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं।उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना, सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सही आंकड़े बेहद जरूरी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि “जनगणना यह सुनिश्चित करने का माध्यम है कि विकास की धारा में समाज का अंतिम व्यक्ति भी समान रूप से सहभागी बन सके।”

प्रदेशभर में चलेगा विशाल अभियान

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश की वर्तमान अनुमानित जनसंख्या लगभग 25 करोड़ 70 लाख है। इतने बड़े स्तर पर जनगणना कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती है।

उन्होंने कहा कि यह कार्य प्रदेश के-

  • 18 मंडलों
  • 75 जनपदों
  • 350 तहसीलों
  • 17 नगर निगमों
  • 745 नगरीय निकायों
  • 21 छावनी परिषदों
  • 57,694 ग्राम पंचायतों
  • लगभग 1.04 लाख राजस्व ग्रामों में संपादित किया जाएगा।

5.47 लाख कार्मिक करेंगे जनगणना कार्य

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि जनगणना कार्य को सफल बनाने के लिए लगभग 5.47 लाख कार्मिकों की तैनाती की जा रही है। इनमें शामिल हैं,4.50 लाख प्रगणक,85 हजार सुपरवाइजर,12 हजार राज्य और जनपद स्तरीय अधिकारी, इसके अतिरिक्त करीब 5.35 लाख कार्मिकों को दोनों चरणों के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में प्रशिक्षित कर्मचारियों की मदद से जनगणना को समयबद्ध और प्रभावी तरीके से पूरा किया जाएगा।

डिजिटल तकनीक से बढ़ेगी पारदर्शिता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से जनगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाया गया है। इसके लिए विशेष जनगणना पोर्टल तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से ग्राम और वार्ड स्तर तक कार्यों की निगरानी की जा सकेगी। अधिकारियों के अनुसार यह पोर्टल रियल टाइम डेटा मॉनिटरिंग में मदद करेगा और कार्यों की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।

योजनाओं के निर्माण में मिलेगी मदद

अधिकारियों का मानना है कि सही जनगणना किसी भी राज्य के विकास की आधारशिला होती है। इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलती है कि किस क्षेत्र में कितनी आबादी है, किन इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य या रोजगार की जरूरत अधिक है और किन वर्गों तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पा रहा। जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही भविष्य की विकास योजनाएं तैयार की जाती हैं। इसलिए सही और सटीक जानकारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

लोगों से की सही जानकारी देने की अपील

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे जनगणना के दौरान सही और तथ्यात्मक जानकारी दें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति केवल एक ही स्थान पर अपनी गणना कराए। मुख्यमंत्री ने कहा कि गलत या अधूरी जानकारी विकास योजनाओं को प्रभावित कर सकती है। इसलिए हर नागरिक का दायित्व है कि वह इस प्रक्रिया में ईमानदारी से सहयोग करे।

वन ग्रामों को पहली बार मिला स्थान

इस बार की जनगणना की सबसे खास बात यह है कि पहली बार वन ग्रामों को भी इसमें शामिल किया जा रहा है। इससे जंगल और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आदिवासी और वन क्षेत्रों के विकास के लिए योजनाएं तैयार करने में बड़ी मदद मिलेगी।

“हमारी जनगणना, हमारा विकास” बना अभियान का संदेश

कार्यक्रम के दौरान ‘हमारी जनगणना, हमारा विकास’ को अभियान का मुख्य संदेश बनाया गया। सरकार का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि जनगणना केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं बल्कि विकास में भागीदारी का माध्यम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सही जनगणना से ही समग्र और समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।