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जिसे सुप्रीम कोर्ट ने नहीं छोड़ा, पांच लाख के मुचलके पर चुटकी बजाते आ गया बाहर

- बैंक घोटाला आरोपी हीरा व्यवसायी उदय देसाई की बेल में जेल अधीक्षक, डीएम की रिपोर्ट बनी मददगार

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जिसे सुप्रीम कोर्ट ने नहीं छोड़ा, पांच लाख के मुचलके पर चुटकी बजाते आ गया बाहर

जिसे सुप्रीम कोर्ट ने नहीं छोड़ा, पांच लाख के मुचलके पर चुटकी बजाते आ गया बाहर

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

लखनऊ. Bank scam accused Uday Desai Case यूपी में प्रशासनिक विभाग की लापरवाही का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। करीब 7800 करोड़ रुपए बैंक घोटाले के आरोपी हीरा कारोबारी उदय देसाई को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जमानत नहीं मिली पर उन्होंने ऐसा तिकड़म भिड़ाया की पांच लाख के निजी मुचलके पर वह 60 दिन के लिए जेल से बाहर हैं। विशेष न्यायाधीश ने शपथपत्र लिया है कि वह देश छोड़कर नहीं जाएगा। फाइल में आदेश न होने की वजह से कारपोरेट मंत्रालय की जांच विंग एसएफआईओ (सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस) को अभी तक आदेश की मूल प्रति नहीं मिली।

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उदय देसाई को जमानत में दिलाने में जेल अधीक्षक, जेल चिकित्सक और जिलाधिकारी की रिपोर्ट मददगार बनी। जेल चिकित्साधिकारी की रिपोर्ट में उदय देसाई का इलाज एसजीपीजीआई लखनऊ के विशेषज्ञों के निर्देश पर करने की बात कही गई थी। साथ ही 65 साल की उम्र में कई गंभीर बीमारियां बताई गईं थी।

डीएम की रिपोर्ट :- डीएम की रिपोर्ट में कहा गया कि उदय सजायाफ्ता नहीं, विचाराधीन बंदी है और उसके मामले में हाई पॉवर कमेटी के निर्देश लागू होते हैं। हालांकि, जमानत के संबंध में फैसले का अधिकार कोर्ट को है। उदय ने जमानत अर्जी पर सुनवाई में विशेष न्यायाधीश के सामने गंभीर बीमारी का तर्क रखा। विशेष न्यायाधीश ने परिस्थितियाें और सभी रिपोर्ट के आधार पर अंतरिम जमानत मंजूर कर ली। जमानत अवधि में कोई गैरकानूनी काम नहीं, बिना कोर्ट की अनुमति देश नहीं छोड़ने और न्यायालय में आत्मसमर्पण कर देने का उदय देसाई ने शपथ दाखिल किया है।

कोरोना काल का मिला फायदा :- कोरोना काल में उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ और हाईकोर्ट की हाई पॉवर कमेटी ने विचाराधीन बंदियों को 60 दिन के लिए शर्तों पर अंतरिम जमानत/पैंडमिक पैरोल पर रिहा करने के निर्देश जारी किए थे। इसी आधार पर 22 जून को रिपोर्ट देखने के बाद कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी।

हाईकोर्ट ने अर्जियां नकारीं :- एसएफआईओ के अधिवक्ता कौशल किशोर शर्मा ने बताया कि, कंपनी अधिनियम के तहत बिना शासकीय वकील का पक्ष सुने बेल प्रार्थना पत्र का निस्तारण नहीं किया जा सकता। उदय देसाई का पैरोल, अंतरिम जमानत व जमानत प्रार्थना पत्र हाईकोर्ट से खारिज हो चुका है। 13 मई 2021 को भी कंपनी एक्ट के विशेष न्यायाधीश की कोर्ट में उदय ने अंतरिम जमानत अर्जी दी थी, लेकिन उसे वापस ले लिया था।

उदय के बेटे को नहीं मिली बेल :- कोरोनाकाल में ही मामले में सहअभियुक्त और उदय के बेटे और सुजय की जमानत अर्जी प्रभारी विशेष न्यायाधीश ने खारिज कर दी थी। उदय पर गंभीर आरोप हैं। कानून के तहत उसे दस साल तक की सजा हो सकती है और लगभग 12 करोड़ रुपए का जुर्माना भी अदा करना पड़ सकता है। आदेश की सत्य प्रति मिलते ही अंतरिम जमानत के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की जाएगी।

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