
विश्व जल दिवस पर के अवसर पर LCWW के संस्थापक समेत कई अन्य सदस्य मौजूद रहे। बैठक में धोबिया आश्रम के जल स्रोतों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि ये स्रोत गोमती नदी के सबसे बड़े जल आपूर्तिकर्ता हैं। आश्रम का प्रतिनिधित्व कर रहे अरुण कपूर ने इस पहल पर खुशी जाहिर की और उम्मीद जताई कि अब इन जल स्रोतों की स्थिति सुधारने के ठोस प्रयास किए जाएंगे।
डॉ. मीनू खरे ने गोमती की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की और सुशील सीतापुरी के प्रयासों की सराहना की। वहीं, सुनील मिश्र ने गोमती की पूरी यात्रा को वीडियो मैपिंग के माध्यम से डॉक्यूमेंट करने की आवश्यकता पर बल दिया। वरिष्ठ एडमिन अनिल शुक्ला ने इस पहल को सराहनीय बताते हुए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। समाजसेवी एवं लेखक नागेंद्र बहादुर सिंह ने सुझाव दिया कि नदी किनारे बसे लोगों को जागरूक किया जाए और एक प्रतिनिधिमंडल सरकार के पास भेजा जाए।
इसके साथ ही सभी सदस्यों ने धोबिया आश्रम के जल स्रोतों का दौरा किया और जागरूकता बढ़ाने के लिए संगीतमय प्रस्तुतियों के माध्यम से जल संरक्षण का संदेश दिया।
लखनऊ समेत कई जिलों में जल संकट गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण और कृषि पर निर्भरता से जल संसाधनों पर दबाव बढ़ गया है। भूगर्भ जल के दोहन के लिहाज से प्रदेश टॉप पर है।
केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) के अनुसार, उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भूजल स्तर में हर साल 10-20 सेंटीमीटर की गिरावट देखी जा रही है। 2017 के संसाधन मूल्यांकन में 9 जिले जिसमें आगरा, अमरोहा, फिरोजाबाद, गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, हापुड़, हाथरस, संभल और शामली शामिल हैं, अत्यधिक दोहन की श्रेणी में थे। यहां दोहन 100% से अधिक था। वहीं गाजियाबाद में यह 128% तक पहुंच गया है। गंगा बेसिन के क्षेत्रों में दोहन 70% की सुरक्षित सीमा को पार हो जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
Published on:
24 Mar 2025 08:57 pm

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