
फिरोजाबाद में वायरल फीवर से 40 बच्चों की मौत, पश्चिमी यूपी में डेंगू तो चार साल बाद फिर पूर्वांचल में फैला जापानी इंसेफेलाइटिस
महेंद्र प्रताप सिंह
लखनऊ. फिरोजाबाद में वायरल बुखार और डेंगू से 46 बच्चों की मौत हो गयी है। आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद सहित पश्चिमी यूपी के कई जिलों में डेंगू बुखार से स्वास्थ्य महकमा हलाकान है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को फिरोजाबाद का दौरा कर रहे हैं। नगर विधायक मनीष असीजा का कहना है एक सप्ताह से यहां डेंगू बुखार का प्रकोप है। उधर, पूर्वांचल में जापानी इंसेफेलाइटिस भी चार साल बाद फिर कहर बरपा रहा (Japanese encephalitis spread again in Purvanchal after four years) है। हालांकि, मीडिया में इसकी खबरें नदारद हैं। अगस्त का महीना बीतने को है लेकिन जापानी इंसेफेलाइटिस से मौतों के सरकारी आंकड़े जारी नहीं हुए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू सवाल उठाते हैं क्या जापानी बुखार यूपी मेंं खत्म हो गया। पत्रिका ने जापानी बुखार की जमीनी हकीकत जानने की कोशिश की तो पता चला कि पूर्वांचल के कई जिलों में इन दिनों इंसेफेलाइटिस का प्रकोप है।
पूर्वांचल में फैला जापानी इंसेफेलाइटिस
गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जापानी बुखार से पीडि़त बच्चे भर्ती हैं। इन्हें तेज बुखार के साथ झटके आ रहे हैं। यह जापानी इंसेफेलाइटिस का प्रमुख लक्षण है। उधर, कुशीनगर में इंसेफेलाइटिस से बच्चे बीमार हैं। कई की मौत हो चुकी है। सामुदायिक केंद्रों में इंसेफेलाइटिस का टीका खत्म हैं। टीकाकरण का काम रुका है। लेकिन, राज्य सरकार का दावा है कि इलाज में कहीं कोई कमी नहीं है। चार साल में इस बीमारी पर लगभग नियंत्रण पाया जा चुका है। आने वाले कुछ वर्षों में इसका पूरी तरह से उन्मूलन हो जाएगा।
तीन साल में घट गयी मरीजों की संख्या
गोरखपुर मंडल के अतिरिक्त स्वास्थ्य निदेशक डॉक्टर रमेश गोयल कहते हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अपनायी गयी रणनीति की वजह से तीन सालों में जापानी इंसेफेलाइटिस के मरीजों की संख्या घटी है। चार साल बाद एक बार फिर इस साल इसमें कुछ बढ़ोत्तरी हुई है। लेकिन मृत्यु दर में काफी कमी आई है। ब्लॉक स्तर के सरकारी अस्पतालों में इटीसी यानी इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर बनाए गए हैं। गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज का 100 नंबर वॉर्ड खासतौर से इस बीमारी से पीडि़त बच्चों के लिए बनाया गया है।
जापानी बुखार के घटते आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2017 में गोरखपुर में दिमागी बुखार से 2864 बच्चे प्रभावित हुए। 2018 में 1242 बच्चे, 2019 में 931 बच्चे और साल 2020 में 913 बच्चे बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुए थे।जबकि, 2021 में यह संख्या घटकर 428 रह गई है। सरकारी आंकड़ों में गोरखपुर में इस साल अब तक 17 बच्चों की मौत हुई है।
विपक्ष का आरोप, आंकड़े छुपा रही सरकार
कांग्रेस का कहना है कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अब बच्चों को एईएस/जेई नाम से भर्ती नहीं किए जा रहे। बल्कि इन्हें एएफआई यानी एक्यूट फिब्राइल इलनेस नामक बीमारी के नाम से भर्ती किया जा रहा है। 2018 से पहले इस नाम से किसी बीमारी को वर्गीकृत नहीं किया गया था। इसलिए आंकड़े घट गए हैं। यह भी आरोप है कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पिछले दो साल से आईसीएमआर को भेजे जाने गए सैंपल्स का कोई विवरण नहीं है। इसके पहले पीडियाट्रिक इंसेंटिव केयर यूनिट से 2019 में 1500 से ज़्यादा बच्चों के सैंपल आईसीएमआर में भेजे गए थे।
हर चार-पांच साल में आता है पीक
अतिरिक्त स्वास्थ्य निदेशक डॉक्टर रमेश गोयल का कहना है कि "जापानी इंसफेलाइटिस हर चार-पांच साल में पीक पर आता है। जब संख्या अचानक इसकी संख्या बहुत बढ़ जाती है। 2017 में ऐसा ही पीक था।"
क्यों होती है बीमारी
पूर्वांचल के गोरखपुर-बस्ती मंडलों के सात जिलों के तराई इलाकों में मॉनसून के बाद जल-जमाव और अन्य वजहों से मच्छरों के पनपने के कारण इंसेफेलाइटिस या दिमागी बुखार फैलता है। बच्चों में तेज बुखार के साथ झटके आते हैं।
Published on:
30 Aug 2021 02:01 pm
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