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हाथरस गैंगरेप कांड : कौन हैं हाथरस डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार

हाथरस गैंगरेप कांड (Hathras gang rape) में अब समूचे विपक्ष के निशाने पर यहां के हाथरस जिलाधिकारी (Hathras DM) आ गए हैं। हाथरस डीएम प्रवीण कुमार (Praveen Kumar Laxkar) राजस्थान के जयपुर के मूल निवासी हैं।

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हाथरस गैंगरेप कांड : कौन हैं हाथरस डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार

हाथरस गैंगरेप कांड : कौन हैं हाथरस डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार

लखनऊ. हाथरस गैंगरेप कांड (Hathras gang rape) में अब समूचे विपक्ष के निशाने पर यहां के हाथरस जिलाधिकारी (Hathras DM) आ गए हैं। हाथरस डीएम प्रवीण कुमार (Praveen Kumar Laxkar) राजस्थान के जयपुर के मूल निवासी हैं। यह वर्ष 2012 बैच के आइएएस अधिकारी हैं। वर्ष 2013 में रायबरेली में ट्रेनी आईएएस के रूप में इनकी पहली तैनाती हुई थी। सात अगस्त 2014 में अलीगढ़ में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के रूप में तैनाती हुई। 21 अप्रैल 2016 में सीडीओ ललितपुर, 17 अप्रैल 2018 में विशेष सचिव पंचायती राज और 2 मार्च 2019 से जिलाधिकारी हाथरस में तैनात हैं।

डीएम के विवादित बोल

-मीडिया वाले चले जाएंगे। हम ही आप के साथ खड़े हैं।
-कहीं हम भी न बदल जाएं, तो होगी मुश्किल
-25 लाख मिल गया अब मुंह बंद रखो
-कोरोना से बेटी मर जाती तो क्या इतना मुआवजा मिलता

जिलाधिकारी को निलंबित करने का क्या है नियम

आइएएस अधिकारियों के सेवा नियम तथा बर्खास्तगी के नियम संविधान के अनुच्छेद 311 में वर्णित हैं। इस अनुच्छेद में संघ या राज्य के तहत सिविल सेवाओं वाली रैंक के व्यक्तियों की बर्खास्तगी, निष्कासन या उसमें कमी के मामलों का वर्णन है। अनुच्छेद 311 के अनुसार, संघ या राज्य के अधीन सिविल हैसियत में नियोजित व्यक्तियों का पदच्युत किया जाना, पद से हटाया जाना या पंक्ति में अवनत किया जाना (1) किसी व्यक्ति को जो संघ की सिविल सेवा का या अखिल भारतीय सेवा का या राज्य की सिविल सेवा का संदस्य है अथवा संघ या राज्य के अधीन कोई सिविल पद धारण करता है, उसकी नियुक्ति करने वाले प्राधिकारी के अधीनस्थ किसी प्राधिकारी द्वारा पदच्युत नहीं किया जाएगा या पद से नहीं हटाया जाएगा। इसके अलावा, उपरोक्त किसी भी व्यक्ति को ऐसे पदों से निलंबित या बर्खास्त कर दिया जाएगा, जिसमें जांच के बाद उसके खिलाफ आरोप साबित हुए हों और उन आरोपों के संबंध में सुनवाई का उचित मौका दिया गया हो। आइएएस ऑफिसर की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है तथा सरकार उसको भारतीय गजट में नोटिफाई करती है इसिलिए यह अधिकारी गज़ेटेड अधिकारी भी कहलाते है। इसका तात्पर्य यह हुआ की राष्ट्रपति के सिवाय इन अधिकारियों को कोई भी बर्खास्त नही कर सकता। राज्य सरकार भी इनको सिर्फ निलंबित ही कर सकती है, बर्खास्तगी का अधिकार राज्य सरकार के पास भी नहीं है।