
लखनऊ. कोरोना संक्रमण के चलते लगाए गए प्रतिबंध की वजह से प्रदूषण कम हुआ है। इसके बावजूद भी राजधानी लखनऊ की हवा जहरीली बनी हुई है। भले ही कोरोना वायरस संक्रमण के चलते राजधानी लखनऊ का वायु प्रदूषण 30% तक कम हुआ है लेकिन इसके बावजूद भी प्रदेश में लखनऊ की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित पाई गई है।
लखनऊ से दिल्ली के नजदीक वाले शहर जैसे गाजियाबाद से अधिक वायु प्रदूषण राजधानी लखनऊ में है। वर्ष 2020 की रिपोर्ट में यहां की हवा सबसे अधिक प्रदूषित रही है। केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की ओर से 2019 में बनाए गए नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के डाटा के आधार पर एनसीएपी ट्रैकर संस्था के आकलन में लखनऊ सबसे अधिक प्रदूषित शहर में शामिल है।
तीनों साल का डाटा देखें तो रिपोर्ट के मुताबिक गाजियाबाद सबसे अधिक प्रदूषित शहर में है लेकिन 2020 में लखनऊ में सबसे ऊपर रहा है। गाजियाबाद का तीनों साल पीएम 2.5 का स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के नजदीक मिला है। वहीं लखनऊ का माइक्रोग्राम स्तर 116 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर 2020 में रिकॉर्ड किया गया है। 2021 में इसमें कमी देखने को मिली है हालांकि अभी लखनऊ यूपी के सबसे प्रदूषित शहरों में है पीएम 2.5 का मानक नेक्स्ट के मुताबिक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है।
लखनऊ में सीपीसीबी वायु प्रदूषण की निगरानी करती है यहां 2 साल तक चार और अब 6:00 लोकेशन पर रियल टाइम मॉनिटरिंग स्टेशन के जरिए पीएम 2.5 के डाटा की निगरानी की जाती है। इससे क्यूआर का आकलन भी होता है 2022 का डाटा देखें तो 365 दिन में से 241 दिन हवा खराब बनी रही। इसकी वजह क्यूआर का 200 के ऊपर बना रहना है।
Published on:
13 Jan 2022 01:15 pm
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