
लखनऊ. आने वाले दिनों में लखनऊ से कानपुर की दूरी केवल चालीस मिनट में तय होगी। यूपी के इन दो बड़े शहरों लखनऊ और कानपुर के बीच आने वाले समय में रेल का सफर 40 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। अभी लखनऊ से कानपुर पहुंचने में डेढ़ घंटे या इससे अधिक का समय लगता है। यहां औसतन 70 से 80 किमी प्रति घंटे की स्पीड से ट्रेने दौड़ रही हैं। इन्हीं ट्रेनों को आने वाले समय में १४० किमी प्रति घंटा के स्पीड से दौड़ाया जाएगा। इसके लिए मौजूदा ट्रैक को सेमी हाई स्पीड ट्रैक में तब्दील किया जा रहा है। नए ट्रैक और स्लीपर का वजन पूर्व से आठ किला अधिक है। ट्रैक को तैयार करने में करीब ढाई सौ करोड़ रुपए खर्च हो रहा है। लखनऊ रेल मंडल के डीआरएम सतीश कुमार ने बताया कि ट्रेनों की स्पीड बढ़ाए जाने के लिए कानपुर-लखनऊ के मध्य पुरानी पटरियों को हटाते हुए 60 किलो की पटरी और स्लीपर बिछाए जा रहे हैं। विभिन्न सेक्शनों में कार्य प्रगति पर है।
यही वजन स्लीपर का भी है
कानपुर-लखनऊ रूट अति व्यस्त मार्गों में शामिल है। मुंबई और बनारस के लिए अहम 70 किमी के सफर में एक्सप्रेस ट्रेनों की अधिकतम चाल है तो 110 किमी प्रति घंटा, लेकिन ट्रैक जर्जर होने से औसतन चाल 70 से 80 किमी प्रति घंटा है। नई दिल्ली- लखनऊ शताब्दी एक्सप्रेस को भी पहुंचने में सवा घंटे से अधिक का समय लगता। वहीं लोकल और पैसेंजर ट्रेनों का हाल और भी ज्यादा खराब है। साल 2002 के बाद ट्रेनों की संख्या तो बढ़ी, लेकिन पटरियों का वजन नहीं बढ़ सका। इस कमी के कारण से ट्रेनों की चाल सुस्त है। रेलवे अब वजन दार स्लीपर व पटरियों को बिछा रहा है। अभी तक जहां पटरी का वजन 52 किलो है उसको हटाकर 60 किलो किया जा रहा है। यही वजन स्लीपर का भी है।
तीन करोड़ का है खर्च
ट्रैक बदले जाने के काम में प्रति किमी का खर्च तीन करोड़ रुपए के करीब है। नए ट्रैक और स्लीपर बिछने के बाद सुपरफास्ट और एक्सप्रेस ट्रेनें जहां 40 मिनट में सफर तय करेंगी तो वहीं एलटीटी एसी सुपरफास्ट और शताब्दी जैसी ट्रेनें तो आधा घंटे में पहुंचेंगी। बतादें कि रेलवे फोर लेन के ट्रैक का भी लक्ष्य साथ लेकर चल रहा है। मुख्य ट्रैक इंजीनियर से लेकर संरक्षा आयुक्त की सर्वे रिपोर्ट उत्तर रेलवे मुख्यालय को सौंपी जा चुकी है। लखनऊ रेल मंडल के डीआरएम सतीश कुमार ने बताया कि ट्रेनों की स्पीड बढ़ाए जाने के लिए कानपुर-लखनऊ के मध्य पुरानी पटरियों को हटाते हुए 60 किलो की पटरी और स्लीपर बिछाए जा रहे हैं। विभिन्न सेक्शनों में कार्य प्रगति पर है।
छह माह में पूरा होगा काम
बजट का कुछ हिस्सा बोर्ड से मंजूर हो भी चुका है। गंगाघाट स्टेशन, मगरवारा, सोनिक, अजगैन से जैतीपुर के मध्य 60 किलो की पटरी व स्लीपर बिछाए जा रहे हैं। गंगाघाट रेलवे पुल पर डाउन व अप दोनों हिस्से में पटरी बदलने का कार्य तेजी पर है। मगरवारा में 35 फीसद कार्य हो चुका है। अन्य सेक्शन में 15 फीसद कार्य हुआ है।
स्मार्ट सिग्नल का भी काम शुरू
ट्रेनों की चाल बढ़ाने के साथ रेलवे कई ट्रेनों को बिना रोके भी चलाएगा। इसके लिए गंगाघाट, मगरवारा, उन्नाव, सोनिक, अजगैन, जैतीपुर के साथ अन्य सेक्शन में स्मार्ट सिग्नल प्रणाली अपनाई जानी है। इसमें ट्रेन को सिग्नल के इंतजार में आउटर पर नहीं रुकना होगा। यदि कोई आपातकालीन की स्थिति है तो ट्रेन को कॉशन आटोमैटिक बीच के स्टेशनों पर ही मिल जाएगा।
Published on:
28 Feb 2018 04:57 pm
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