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Maa Chandrika Devi: लखनऊ के मां चंद्रिका देवी मंदिर में अनोखा भंडारा: गैस की कमी में लकड़ी के चूल्हों पर बन रहा प्रसाद

Maa Chandrika Devi Temple Navratri Bhandara: लखनऊ के मां चंद्रिका देवी मंदिर में चैत्र नवरात्र के दौरान भंडारा लकड़ी के चूल्हों पर तैयार हो रहा है, गैस की कमी के बीच परंपरा और सेवा का अनूठा संगम दिख रहा है।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Mar 26, 2026

लखनऊ मंदिर में लकड़ी के चूल्हे पर भंडारा, गैस की कमी के बीच सेवा जारी (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

लखनऊ मंदिर में लकड़ी के चूल्हे पर भंडारा, गैस की कमी के बीच सेवा जारी (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

Maa Chandrika Devi Temple: उच्च शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों के बीच राजधानी का लखनऊ विश्वविद्यालय एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। अब विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को पढ़ाई का अहम हिस्सा बनाया जाएगा। यह निर्णय विज्ञान संकाय की फैकल्टी बोर्ड की बैठक में लिया गया, जिसे उच्च शिक्षा के आधुनिक स्वरूप की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, एआई को स्नातक (यूजी), स्नातकोत्तर (पीजी) और शोध स्तर (पीएचडी) के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाएगा। इस फैसले का उद्देश्य छात्रों को नई तकनीकों के अनुरूप तैयार करना और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम बनाना है। वर्तमान समय में एआई का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, वित्त और शोध सहित लगभग हर क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे में छात्रों को इसकी जानकारी देना बेहद जरूरी हो गया है।

फैकल्टी बोर्ड की बैठक में यह भी तय किया गया कि कंप्यूटर साइंस, फिजिक्स और गणित जैसे प्रमुख विषयों में एआई को विशेष रूप से शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही सांख्यिकी (स्टैटिस्टिक्स) विषय में भी एआई से जुड़े टॉपिक्स को जोड़ा जाएगा, ताकि डेटा एनालिसिस और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में छात्रों की समझ विकसित हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इन विषयों के साथ एआई का संयोजन छात्रों को बेहतर करियर विकल्प प्रदान करेगा।

विश्वविद्यालय के शिक्षकों का कहना है कि एआई को पाठ्यक्रम में शामिल करने से छात्रों को न केवल तकनीकी ज्ञान मिलेगा, बल्कि उनकी समस्या समाधान क्षमता और विश्लेषणात्मक सोच भी विकसित होगी। इसके जरिए वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार हो सकेंगे। साथ ही, यह पहल विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

हालांकि, इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के लिए 28 मार्च को होने वाली विश्वविद्यालय परिषद की बैठक में मंजूरी आवश्यक होगी। परिषद की स्वीकृति मिलने के बाद इसे आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू कर दिया जाएगा। माना जा रहा है कि इस फैसले को परिषद से आसानी से मंजूरी मिल जाएगी, क्योंकि यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के उद्देश्यों के अनुरूप है।

छात्रों के बीच भी इस फैसले को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। कई छात्रों का कहना है कि एआई जैसे विषय को पढ़ाई में शामिल करने से उन्हें नए अवसर मिलेंगे और वे तकनीकी क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे। वहीं, कुछ छात्रों ने यह भी सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय को एआई से जुड़े प्रैक्टिकल और इंडस्ट्री आधारित प्रशिक्षण पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि वे वास्तविक दुनिया की जरूरतों को समझ सकें।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में एआई का महत्व और बढ़ेगा। ऐसे में विश्वविद्यालयों द्वारा इसे पाठ्यक्रम में शामिल करना समय की मांग है। इससे न केवल छात्रों को लाभ होगा, बल्कि देश की तकनीकी प्रगति में भी योगदान मिलेगा। भारत सरकार भी डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसे अभियानों के तहत एआई को बढ़ावा दे रही है, ऐसे में इस तरह के कदम बेहद महत्वपूर्ण हैं।

इसके अलावा, विश्वविद्यालय प्रशासन एआई से जुड़े नए कोर्स, वर्कशॉप और सेमिनार आयोजित करने की भी योजना बना रहा है। इसके लिए विशेषज्ञों और उद्योग जगत के पेशेवरों को आमंत्रित किया जाएगा, ताकि छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान मिल सके। साथ ही, रिसर्च के क्षेत्र में भी एआई को बढ़ावा देने के प्रयास किए जाएंगे, जिससे विश्वविद्यालय की शोध गतिविधियों में गुणवत्ता और नवाचार बढ़ सके।

इस पहल के तहत छात्रों को मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, रोबोटिक्स, डीप लर्निंग और ऑटोमेशन जैसे विषयों की जानकारी दी जाएगी। इससे वे आईटी सेक्टर, स्टार्टअप्स और रिसर्च संस्थानों में बेहतर अवसर हासिल कर सकेंगे। वर्तमान समय में एआई विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में यह कदम छात्रों के करियर के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।

कुल मिलाकर, लखनऊ विश्वविद्यालय का यह निर्णय शिक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा की ओर संकेत करता है। एआई को पाठ्यक्रम में शामिल करने से न केवल छात्रों का भविष्य उज्ज्वल होगा, बल्कि यह विश्वविद्यालय को भी आधुनिक और प्रगतिशील संस्थानों की श्रेणी में खड़ा करेगा। अब सभी की नजरें 28 मार्च को होने वाली परिषद की बैठक पर टिकी हैं, जहां इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलने की उम्मीद है।