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अब असली रटौल आम का स्वाद ले सकेंगे आप, मिला जीआई टैग

- यूपी की करीब 26 वस्तुओं को मिल चुका है जीआई टैग- सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया सीआईएसएच की मदद से आगे बढ़ी- पाकिस्तान भी रटौल आम पर पेश कर रहा था अपना दावा

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अब असली रटौल आम का स्वाद ले सकेंगे आप, मिला जीआई टैग

अब असली रटौल आम का स्वाद ले सकेंगे आप, मिला जीआई टैग

लखनऊ. दशहरी के साथ अगर आपको रटौल आम (Rataul mango) मिल जाए तो तय करना मुश्किल हो जाएगा कि कौन सा आम खाएं। क्योंकि रटौल आम के भी दीवाने काफी हैं। एक खुशखबर यह है कि आम रटौल को जियोग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्री ने प्रतिष्ठित जियोग्राफिकल इन्डिकेशन प्रमाण पत्र (जीआई टैग) (Geographical Indication) दे दिया है। जिस तरह से दशहरी गांव से दशहरी आम निकाला है ठीक वैसे ही बागपत जिले (Baghpat district) के रटौल गांव से रटौल आम लोकप्रिय हुआ है। यूपी के दशहरी के अतिरिक्त 9 आम की प्रजातियां को जीआई टैग प्राप्त है। योगी सरकार प्रयासरत है कि, यूपी के गौरजीत, बनारसी लंगड़ा और चौसा को जीआई टैग का सम्मान मिले। उत्तर प्रदेश की करीब 26 वस्तुओं को जीआई टैग मिल चुका है।

सीआईएसएच बना मददगार :- जीआई टैग के लिए रटौल मैंगो प्रोड्यूसर एसोसिएशन पिछले करीब 10 साल से प्रयासरत रही है। मगर इसकी सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया ने साल 2020 से गति पकड़ना शुरू किया है जब सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर (सीआईएसएच) (Central Institute of Subtropical Horticulture, Lucknow ) मदद को आगे आया। रटौल आम अपनी बेहतरीन सुगंध और स्वाद के लिए जाना जाता है।

पाकिस्तान भी था दावेदार :- रटौल आम की राह में काफी रोड़े थे। पाकिस्तान भी रटौल आम पर अपना दावा पेश कर रहा था। विभाजन के वक्त रटौल पाकिस्तान (Pakistan) पहुंच गया था। और पाकिस्तान से खाड़ी देशों में अनवर रटौल के नाम से निर्यात किया जाने लगा। पर भारत ने अपनी बात और पक्के सुबूत को मेहनत के साथ रखा। जिस वजह से भारत ने पाकिस्तान को पटखनी दी।

अन्य आमों के लिए भी प्रक्रिया जारी :- सीआईएसएच निदेशक शैलेंद्र राजन ने बताया कि, यूपी के चौसा और गौरजीत आम के लिए भी आवेदन किया गया हैं। इसके अलावा, बनारसी लंगड़ा के लिए जीआई पंजीकरण प्रक्रिया भी चल रही है।

जीआई टैग क्या है?:- जियोग्राफिकल इंडिकेशंस टैग एक प्रकार का लेबल होता है जिसमें किसी उत्पाद को विशेष भौगोलि‍क पहचान दी जाती है। ऐसा उत्पाद जिसकी विशेषता या फिर प्रतिष्‍ठा मुख्‍य रूप से प्रकृति और मानवीय कारकों पर निर्भर करती है। ‘जियोग्राफिकल इंडिकेशंस ऑफ गुड्स’ के आधार पर भारत के किसी भी क्षेत्र में पाए जाने वाली विशिष्ट वस्तु का कानूनी अधिकार उस राज्य को दे दिया जाता है। इसके बाद दूसरे लोग उस पर अपना दावा नहीं पेश कर सकते हैं।

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370 वस्तुओं को जीआई टैग :- भारत में अब तक 370 वस्तुओं को जीआई प्रोडक्ट के रूप में मान्यता मिल चुकी हैं। यूपी में करीब 26 वस्तुओं को जीआई टैग मिल चुका है। भारत में वाणिज्‍य मंत्रालय के तहत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्‍ट्री प्रमोशन एंड इंटरनल ट्रेड की तरफ से जीआई टैग दिया जाता है। दुनिया में सबसे अधिक जीआई टैग्‍स जर्मनी के पास हैं।