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सिर्फ एक SMS और बढ़ जाती हैं दाल की कीमतें, जानिए कैसे

पत्रिका की पड़ताल में सामने आया है कि दाल के बाद अब चावल की कीमतों के बढ़ने के आसार हैं। इसके लिए बड़े व्यापारियों ने पहले से पृष्ठभूमि तैयार कर ली है।

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Oct 20, 2015

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प्रशांत मिश्रा



लखनऊ.
दाल के थोक व्यापारियों के पास एक
एसएमएस आता है और दाल की कीमतें बढ़ घट जाती हैं। ये एसएमएस ही लखनऊ की दाल
मार्केट में कीमतों का निर्धीरण करते है। स्टॉक एक्चेंज के NDX
नाम से आने वाले मैसेज में हर प्रदेश में दाल के दामों का विवरण दिया
रहता है, जिसके आधार पर लोकल और थोक व्यापारी कीमतों में उतार-चढ़ाव करते है। यह मैसेज मुम्बई स्टॉक एक्सचेंज
की ओर से आता है, जो हर प्रदेश की खाद्य सामग्रियों की कीमतें निर्धारित कर
भेजता है। NDX स्टॉक एक्चेंज का एक अंग है, जो पूरे देश में खाद्य सामग्रियों की कीमतें
निर्धारित करता है।


पड़ताल
करने पर पता चला कि यह सब एक बड़ा नेटवर्क है, जिसके तहत दाल के रेट
कम-ज्यादा होते हैं। राजधानी में दाल का व्यापार करने वाले मुन्ना
जायसवाल ने बताया कि दाल की कीमतों को निर्धारित करने में बड़े व्यापारी
खेल करते
हैं। ये व्यापारी प्राकृतिक आपदा, ट्रकों की हड़ताल का बहाना कर बड़े
पैमाने पर कालाबाजारी कर दाल की सप्लाई
रोक देते है और स्टॉक एक्चेंज व NDX(Nordic derivatives exchange) दाल की कीमतें बढ़ा देता है।

उन्होंने बताया कि दाल के दामों पर बड़े पैमाने पर सट्टेबाजी होती है और यह
सारा खेल बड़े व्यापारियों के इशारों पर होता है। इतना ही नहीं जायसवाल की
मानें तो दाल के बाद अब चावल की कीमतों के बढ़ने के आसार हैं। इसके लिए
बड़े व्यापारियों ने पहले से पृष्ठभूमि तैयार कर ली है।

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प्रदेश में नहीं है दाल की कमी

दाल की बढ़ती कीमतों के पीछे मुख्य कारण
दाल की मांग की अपेक्षा सप्लाई का कम होना माना जाता है। पर प्रदेश के व्यापारयों
के पास दाल की कमी नही है। शहर की सबसे बड़ी दाल मार्केट पांडेगंज के दाल के थोक
व्यापारी रामचन्द्र मिश्रा ने बताया कि मार्केट में दाल की कमी नहीं है पर एसएमएस
में जो रेट डिसाइड होकर आता है, हम उसी रेट पर दाल बेचते हैं। ये एक व्यवस्था बन गयी
है, जिसके अनुसार सभी व्यापारियों को चलना होता है।

रेट बढ़ने से नहीं बिक रही दाल

व्यापारियों ने बताया की दाल की
कीमतें बढ़ने से दाल की बिक्री पर भी खासा असर पड़ा है। कीमतें तो एसएमएस के आधार
पर बढ़ा दी जाती हैं, पर दाल की कीमतों के
बढ़ने से छोटे व फुटकर व्यापारी दाल कम खरीदते हैं, जिससे दाल का स्टॉक बढ़ता जाता है। अगर हम दाल
कम कीमत पर बेचना भी चाहें तो बाकी व्यापारी विरोध करते हैं।

मीडिया भी बढ़ाता है दाल की कीमतें

व्यापारियों
का कहना है कि दाल की कीमतों को बढ़ाने में मीडिया का भी योगदान होता है। बहुत से व्यापारी तो समाचार पत्रों
में छपे दाल की कीमतों के आधार पर दाल की कीमतें बढ़ाते-घटाते हैं।

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सरकार की सख्ती के बाद सस्ती हुई
दाल

पिछले दो दिनों में सरकार की
सख्ती के बाद दाल की कीमतों परखासा
उतार आया है। 17 अक्टूबर को जो अरहर
की दाल थोक भाव में 180 रुपए प्रति किलो बिक रही थी, वही दो दिन बाद 165
रुपए प्रति किलो की दर उपलब्ध है। अनुमान है कि सरकार की छापेमारी के बाद
दाल की कीमतों में काफी कमी आएगी।

गौरतलब है कि पिछले दिनों प्रमुख सचिव खाद्य-रसद सुधीर गर्ग ने ऐलान किया था कि
दाल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बड़े पैमाने पर दाल व्यापारियों के स्टॉक की
जांच छापेमारी की जाएगी। आदेश के तुरंत बाद कई जगहों पर छापेमारी भी की गई, जिसका असर
है कि दाल की कीमतें नियंत्रित हुई हैं।

ये उत्पाद भी है महंगे

दाल
के साथ-साथ कड़वा तेल व सोयाबीन
की बड़ी भी बाजार में काफी महंगी चल रही
है। कड़वा तेल जहां 75 से 90 रुपए लीटर मिलता था, अब वह बाजार में 110 से
120 रुपए प्रति लीटर की दर से मिल रहा है। वहीं सोयाबीन की बड़ी 50 रुपए
प्रति किलो के भाव से बढ़कर 60 से 65 रुपए प्रति किलो हो गई है।

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