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आरटीआई की ताकत, 10 रुपए खर्च कर मिली एक अरब की संपत्ति

करीब 36 साल से अपने पुश्तैनी महल के स्वामित्व के लिए भटक रहे ओयल रियासत से जुड़े राजपरिवार को सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत 10 रुपए की याचिका ने दस माह में एक अरब की सम्पति का मालिक साबित कर दिया।

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आरटीआई की ताकत, 10 रुपए खर्च कर मिली एक अरब की संपत्ति

आरटीआई की ताकत, 10 रुपए खर्च कर मिली एक अरब की संपत्ति

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

लखनऊ. महज 10 रुपए खर्च कर एक अरब की संपत्ति का मिलना आठवें अजूबे की तरह है। चौंक गए होंगे पर आम जनता की मदद के लिए बनाया गए आरटीआई ने आज एक राजा की मदद कर अपनी ताकत को दिखा दिया। करीब 36 साल से अपने पुश्तैनी महल के स्वामित्व के लिए भटक रहे ओयल रियासत से जुड़े राजपरिवार को सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत 10 रुपए की याचिका ने दस माह में एक अरब की सम्पति का मालिक साबित कर दिया।

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सिर्फ 101 रुपए प्रतिमाह किराया :- खीरी की एक बड़ी रियासत है, जिसका नाम ओयल है। ओयल रियासत के बड़े राजा विष्णु नारायण दत्त सिंह व कुंवर हरि नारायण सिंह इस वक्त खुशी से झूम रहे हैं। इसी लौ में उन्होंने बताया कि वर्ष 1928 में खीरी जिले की ओयल रियासत के तत्कालीन राजा युवराज दत्त ने अपने महल को तीस साल के लिए डिप्टी कलेक्टर को 101 रुपया प्रतिमाह किराए पर दिया था। देश आजाद हुआ तो यह किराएदारी फिर तीस साल के लिए बढ़ा दी गई। किराया शर्त थी कि राज परिवार चाहे तो 101 रुपए की जगह डिप्टी कलक्टर के वेतन की दस फीसद धनराशि किराये के रूप में ले सकता है।

10 रुपए के आरटीआई की ताकत :- राजा विष्णु नारायण दत्त सिंह बताते है कि, अचानक युवराज दत्त की वर्ष 1984 में मृत्यु हो गई। इसके बाद से राजपरिवार अपने महल की वापसी चाहते थे पर मालिकाना हक से जुड़े अभिलेख ढूंढने पर भी नहीं मिल रहे थे। सब खोज में लगे थे और बेबस हो गए। इस बीच आरटीआई कार्यकर्ता सिद्धार्थ नारायण से सम्पर्क हुआ और फिर 10 रुपए के आरटीआई ने अपनी जो ताकत दिखाई उसका रिजल्ट सामने है।

अभिलेखों से जुड़ी सूचनाएं मांगी :- आरटीआई कार्यकर्ता सिद्धार्थ नारायण ने राज परिवार की मदद करते हुए 10 रुपए के प्रार्थना पत्र पर 28 अगस्त, 2019 को चार याचिकाएं जिलाधिकारी कार्यालय खीरी, मंडलायुक्त कार्यालय, वित्त विभाग एवं राजस्व परिषद को पार्टी बनाते हुए दाखिल की और महल के मूल अभिलेखों से जुड़ी सूचनाएं मांगी।

पहले अभिलेख सीतापुर में रखे जाते थे :- इन सभी चार याचिकाओं को डीएम कार्यालय भेज दिया गया। 27 मार्च, 2020 को लिखित सूचना मिली कि मूल अभिलेख सीतापुर के उप निबंधक कार्यालय में हो सकते हैं। इसमें वजह यह बताई गई कि आजादी पूर्व लखीमपुर खीरी के अभिलेख सीतापुर में रखे जाते थे। इसके बाद पांच याचिकाएं आरटीआई उप निबंधक कार्यालय सीतापुर में दायर की गईं और 21 अक्तूबर, 2020 को महल के स्वामित्व से जुड़े मूल अभिलेख मिल गए।

मालिकाना हक से जुड़े कागज मिले :- आरटीआई शुल्क का सिर्फ 10 रुपये खर्च कर राज परिवार के वारिसों को 93 साल पुराने मालिकाना हक से जुड़े वे सभी अभिलेख प्राप्त हो गए। अभिलेख में खाता संख्या-5 व मूल खसरा संख्या 359 है। वर्तमान में इस पुश्तैनी महल की बाजार कीमत करीब एक अरब रुपए आंकी गई है।

एक अरब रुपए का मिला महल :- ओयल राजपरिवार के विष्णु नारायण सिंह, कुंवर प्रद्युम्न नारायण सिंह और हरिनारायण सिंह ने बताया कि, वर्ष 1988 से किराया नहीं मिला है, लेकिन हमारे लिए अभिलेख अहम हैं। हमारे पूर्वजों की एक धरोहर सिर्फ कागज की कमी के चलते हमसे दूर जाती लग रही थी। अब पिछला किराया लेना है या नहीं, हम परिवार में बैठकर तय करेंगे। इस लड़ाई में लखीमपुर के डीएम शैलेंद्र कुमार ने बहुत सहयोग किया। डीएम से महल के बेहतर रखरखाव और पर्यावरण की दृष्टि से हरा-भरा रखने की अपील की। आरटीआइ एक्टिविस्ट सिद्धार्थ नारायण सिंह ने कहाकि, अगर हम कोर्ट कचहरी जाते तो बरसों लग जाते, लेकिन सिर्फ दस महीने में दस रुपए खर्च करके महल के कागज मिल गए।